अब तो पंछी भी घर नहीं आते
आने वाले इधर नहीं आते
कुछ ख़यालात इस क़दर रूठे
पाँव आते हैं सर नहीं आते
सच यही है कि दुख जताने को
लोग आते हैं पर नहीं आते
देश दुनिया की बात करते हैं
आप उस बात पर नहीं आते!
वक़्त के साथ उड़ गए पंछी
फिर कभी लौट कर नहीं आते
द्वंद्व के बीच पिस गए शाइ'र
अब कहीं भी नज़र नहीं आते
बात करने को बात करते हैं
बात करने मगर नहीं आते
— Aman G Mishra















