कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाएकहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाएअजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो करहम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए— Farhat Abbas Shah