हम नदी के पार जाना चाहते थे
ज़िन्दगी के पार जाना चाहते थे
जो ख़ुशी इस पार है उस पार भी हो
हम ख़ुशी के पार जाना चाहते थे
ज़िन्दगी भर हम समय की पीर गाकर
इस सदी के पार जाना चाहते थे
हम किसी के पार जाना चाहते क्यूँ
हम ख़ुदी के पार जाना चाहते थे
वो अँधेरे से लड़ाई लड़ रहे जो
रौशनी के पार जाना चाहते थे
हम ग़ज़ल की क्लास में पीछे खड़े थे
शा'इरी के पार जाना चाहते थे
क्या पढ़ाई क्या लिखाई क्या अमन जी
बेबसी के पार जाना चाहते थे
— Aman G Mishra















