sukoon qalb ko jis se mil jaaye taabaan | सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'

  - Anwar Taban

सुकून क़ल्ब को जिस से मिल जाए 'ताबाँ'
ग़ज़ल कोई ऐसी सुना दीजिएगा

  - Anwar Taban

Peace Shayari

Our suggestion based on your choice

    सिवाए तालियों के कुछ नहीं मिलता
    ग़ज़लगोई फ़क़त धंधा सुकूँ का है
    Neeraj Neer
    हमारी मौत पर बेशक़ ज़माना आएगा रोने
    मगर ज़िंदा हैं जब तक चैन से जीने नहीं देगा
    Astitwa Ankur
    30 Likes
    हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
    वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

    कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
    मिला सुकून जहां में तो रब को भूल गए
    Read Full
    Hameed Sarwar Bahraichi
    थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते
    कुछ और थक गया हूँ आराम करते करते
    Zafar Iqbal
    25 Likes
    हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
    गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
    Sahir Ludhianvi
    62 Likes
    अब आ भी जाओ के सुकूंँ मिले मुझे
    अगर जो जाना था तो क्यूंँ मिले मुझे

    ज़माना हो न हो रकी़ब बीच में
    तू अब कभी मिले तो यूंँ मिले मुझे
    Read Full
    Faiz Ahmad
    दिल्ली से हम ही बोला करें अम्न की बोली
    यारो तुम भी कभी लाहौर से बोलो
    Rahat Indori
    69 Likes
    दिल है परेशाँ उन की ख़ातिर
    पल भर को आराम नहीं है
    Anwar Taban
    27 Likes
    सुकून देती थी तब मुझको वस्ल की सिगरेट
    अब उसके हिज्र के फ़िल्टर से होंठ जलते हैं
    Upendra Bajpai
    22 Likes
    चैन की बाँसुरी बजाइये आप
    शहर जलता है और गाइये आप

    हैं तटस्थ या कि आप नीरो हैं
    असली सूरत ज़रा दिखाइये आप
    Read Full
    Gorakh Pandey
    23 Likes

More by Anwar Taban

As you were reading Shayari by Anwar Taban

    तू उस निगाह से पी वक़्त-ए-मय-कशी 'ताबाँ'
    की जिस निगाह पे क़ुर्बान पारसाई हो
    Anwar Taban
    14 Likes
    सितम है अपना किसी ने बना के लूट लिया
    मिरी नज़र से नज़र को मिला के लूट लिया

    हरीम-ए-नाज़ के पर्दे में जो निहाँ था कभी
    उसी ने शोख़ अदाएँ दिखा के लूट लिया

    रहा न होश मुझे उस के बा'द फिर कुछ भी
    की जब किसी ने मुक़ाबिल में आ के लूट लिया

    अजीब नाज़ से उल्टी नक़ाब-ए-रुख़ इस ने
    की मुझ को रूह-ए-मुनव्वर दिखा के लूट लिया

    लो हम भी आज तो 'ताबाँ' फ़रेब खा बैठे
    किसी ने यूँही मोहब्बत से जा के लूट लिया
    Read Full
    Anwar Taban
    ये यक़ीं है की मेरी उल्फ़त का
    होगा उन पर असर कभी न कभी
    Anwar Taban
    22 Likes
    ख़ुशी की बात और है ग़मों की बात और
    तुम्हारी बात और है हमारी बात और
    Anwar Taban
    27 Likes
    लब पर उन का नाम नहीं है
    चैन नहीं आराम नहीं है

    लाख बचाओ मुझ से दामन
    मेरी मोहब्बत ख़ाम नहीं है

    दिल है परेशाँ उन की ख़ातिर
    पल भर को आराम नहीं है

    मेरी मोहब्बत उन पर कामिल
    इश्क़ मिरा नाकाम नहीं है

    मुश्किल है हर कोई देखे
    उस का जल्वा आम नहीं है

    पैकर-ए-उल्फ़त हूँ मैं 'ताबाँ'
    नफ़रत मेरा काम नहीं है
    Read Full
    Anwar Taban

Similar Writers

our suggestion based on Anwar Taban

Similar Moods

As you were reading Peace Shayari Shayari