प्रेम के हम गीत गाकर क्या करेंगे

नेह के मनमीत पाकर क्या करेंगे

हम नहीं हो पाय हैं अब तक ख़ुदी के
आप को अपना बना कर क्या करेंगे

जानते हो उलझने हैं ज़िन्दगी में
आप को उन
में फँसाकर क्या करेंगे।

रात भर हैं जागते सपने सँजोते,
आप की नींदें उड़ाकर क्या करेंगे

आप जो हैं देख कर मुँह फेर लेते
आप के सपने सजा कर क्या करेंगे

आज राहों में बिछे हैं फूल माना
पाँव के छाले भुला कर क्या करेंगे

कारना
में जानती है ज़िन्दगी ये
ज़िन्दगी से मुँह छुपा कर क्या करेंगे

अब नहीं होते रुआँसे गाँव तजकर,
गाँव में इक घर बना कर क्या करेंगे

ज़िन्दगी भर की कमाई शा'इरी है,
शा'इरी से जी चुरा कर क्या करेंगे।

— Aman G Mishra

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