Kanha Mohit

Top 10 of Kanha Mohit

    सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए
    देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया
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    छोड़ आया मैं उसे वो फिर अकेला रह गया
    गाँव में बूढ़ा पिता आख़िर अकेला रह गया

    सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए
    देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया

    इश्क़ के बाज़ार में बोली दिलों की लग गई
    बिक गए सस्ते मेरा नादिर अकेला रह गया

    भक्त तेरे पूजते हैं तुझ को देवी मानकर
    सब पे तेरा ध्यान है काफ़िर अकेला रह गया

    पेट सबका माँगता है एक दो ही रोटियाँसठ तो घर जा चुका क़ासिर अकेला रह गया

    मज़हबी बातों के पीछे भाई भाई लड़ रहे
    मस्जिदें तन्हा हुई मन्दिर अकेला रह गया
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    रात से तेरी बातें मैं करता रहा
    चाँद बैठा रहा सुब्ह तक रू-ब-रू
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    चूम लेना लबों को मिलो गर कभी
    सब्र का फल मिले मुझ को भी आपसे
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    अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
    कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे
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    बहुत बातें हुई हैं ताज़गी की
    ग़ज़ल की क़ाफिये की शा'इरी की

    मेरी आँखों ने दिल से बात छेड़ी
    हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की

    हसीं दुनिया में होंगे और भी पर
    अलग ही बात है तुझ सुरमई की

    तुझे छूने से भी कतरा रहा हूँ
    मुहब्ब्त है मेरी पाकीज़गी की

    अब इस के बा'द बाक़ी क्या रहेगा
    तू मूरत आख़िरी है इस सदी की
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    कमाने की अपनी ज़रूरत के पीछे
    सभी दौड़ते हैं मुसीबत के पीछे

    अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
    की सहमा है सूरज इमारत के पीछे

    तिरंगे में लिपटे हज़ारो सिपाही
    मिटे हैं वतन की हिफ़ाज़त के पीछे

    पिता ने कमाया था बेटे की ख़ातिर
    उड़ाया गया सब बुरी लत के पीछे

    वकीलों से पूछो सबूतों की गिनती
    ख़रीदे गए जो अदालत के पीछे
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    हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे
    दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है
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