सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए
देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया
देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया
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छोड़ आया मैं उसे वो फिर अकेला रह गया
गाँव में बूढ़ा पिता आख़िर अकेला रह गया
गाँव में बूढ़ा पिता आख़िर अकेला रह गया
सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए
देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया
इश्क़ के बाज़ार में बोली दिलों की लग गई
बिक गए सस्ते मेरा नादिर अकेला रह गया
भक्त तेरे पूजते हैं तुझ को देवी मानकर
सब पे तेरा ध्यान है काफ़िर अकेला रह गया
पेट सबका माँगता है एक दो ही रोटियाँसठ तो घर जा चुका क़ासिर अकेला रह गया
मज़हबी बातों के पीछे भाई भाई लड़ रहे
मस्जिदें तन्हा हुई मन्दिर अकेला रह गया
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रात से तेरी बातें मैं करता रहा
चाँद बैठा रहा सुब्ह तक रू-ब-रू
चाँद बैठा रहा सुब्ह तक रू-ब-रू
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चूम लेना लबों को मिलो गर कभी
सब्र का फल मिले मुझ को भी आपसे
सब्र का फल मिले मुझ को भी आपसे
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अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे
कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे
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कमाने की अपनी ज़रूरत के पीछे
सभी दौड़ते हैं मुसीबत के पीछे
सभी दौड़ते हैं मुसीबत के पीछे
अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
की सहमा है सूरज इमारत के पीछे
तिरंगे में लिपटे हज़ारो सिपाही
मिटे हैं वतन की हिफ़ाज़त के पीछे
पिता ने कमाया था बेटे की ख़ातिर
उड़ाया गया सब बुरी लत के पीछे
वकीलों से पूछो सबूतों की गिनती
ख़रीदे गए जो अदालत के पीछे
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