Kanha Mohit

Kanha Mohit

@Kanhamohit

Kanha Mohit shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kanha Mohit's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

10

Content

25

Likes

174

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal

Sher

मेरे नज़दीक आई बा'द उस के और दो लड़की उदासी और तन्हाई मुझे पागल बना देंगी — Kanha Mohit
मज़हबी बातों के पीछे भाई भाई लड़ रहे मस्जिदें तन्हा हुई मन्दिर अकेला रह गया — Kanha Mohit
छोड़ आया मैं उसे वो फिर अकेला रह गया गाँव में बूढा पिता आख़िर अकेला रह गया — Kanha Mohit
चूम लेना लबों को मिलो गर कभी सब्र का फल मिले मुझ को भी आपसे — Kanha Mohit
अभी चाहिए और कितनी बुलंदी कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे — Kanha Mohit
हमें देख कर लोग सोचा करेंगे कुमारी है कान्हा या कान्हा कुमारी — Kanha Mohit
उस का माथा उस की आँखें दोनों चूमूँ मैं फिर पूरी शब इकटक उस को सोते देखूँ मैं — Kanha Mohit
सुन पाओगे इस दिल की हर धड़कन को तुम लग कर तो देखो सीने से मेरे — Kanha Mohit
सभी को बोझ लगता है मेरा होना ज़माने में अगर मैं बोझ बन जाऊँ मेरे पँखे के ऊपर तो — Kanha Mohit
जब भी उस को बोलता हूँ प्यार का इज़हार कर बोलती है सब्र कर तू सब्र कर तू सब्र कर — Kanha Mohit
सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया — Kanha Mohit
रात से तेरी बातें मैं करता रहा चाँद बैठा रहा सुब्ह तक रू-ब-रू — Kanha Mohit
मेरी आँखों ने दिल से बात छेड़ी हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की — Kanha Mohit
ये पोखर सितमगर मुझे क्या करेगा निकल कर मैं आया हूँ बहती नदी से — Kanha Mohit
चमकती हैं वो हर लम्हा निहारो उस की आँखों को वो लड़की जान है मेरी जो इस दिल में धड़कती है — Kanha Mohit
हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है — Kanha Mohit
पढ़ रहे हो ख़याल जो मेरे रात भर की मेरी कमाई है — Kanha Mohit

Ghazal

जिसे ना-क़ाबिल-ए-बरदाश्त हों ये मुश्किलें उस की भला कैसे सहेगा एक पल भी नफ़रतें उस की ख़ुदा मुझ को अता कर धूप जो है उस के हिस्से में बना ठंडी हवाऍं और सारी बारिशें उस की सलामत गर चमक चाहे तू अपने चाँद तारों में तो इन को बोल दे मौला कि ये जानिब झुकें उस की ख़जिल कोयल भी हो जाए अगर आवाज़ सुन ले तो हवाऍं भी महक जाएँ अगर ज़ुल्फ़ें उड़ें उस की ख़ुदा तू छीन ले सब कुछ मेरा बदले में दे मुझ को फ़क़त क़ुर्बत शरारत और सारी ख़्वाहिशें उस की मैं यूँॅं हीं जागता था रात भर फिर याद आया ये ये तकिया एक दिन रक्खा हुआ था गोद में उस की — Kanha Mohit
दिल-ए-खूँ को कोई तसल्ली नहीं है दवा भी कोई काम आती नहीं है समझता नहीं कोई रू-पोश का ग़म उदासी की चादर उतरती नहीं है तेरे साथ घूमा तो अच्छी लगी थी बिना तेरे पहले सी दिल्ली नहीं है ख़मोशी उदासी ख़ुमारी फ़क़ीरी जवानी के जैसी जवानी नहीं है तुम्हें ही गले से लगानी पड़ेगी गले ख़ुद ही रस्सी लगाती नहीं है गुज़रती हुमा सिर के ऊपर से लेकिन शिकारी की फ़ितरत बदलती नहीं है वो दीवार तस्वीर कमरा हमारा पुकारें उसे पर वो आती नहीं है गुलों की अना देख कर आज समझा अना आप की फिर तो कुछ भी नहीं है वो आएगी घर पर पड़ोसी कहेंगे हमें गोर की जानकारी नहीं है मुसव्विर तो मोहित भी अच्छा था लेकिन तसव्वुर में तस्वीर उतरती नहीं है — Kanha Mohit