तुम्हारी बदौलत हूँ ज़िंदा कुमारी

तुम्हारा रहूॅंगा हमेशा कुमारी

ग़मों के समुन्दर में डूबा था जब मैं
पकड़ हाथ तुम ने निकाला कुमारी

ख़ुदा का इशारा समझ में जो आया
तुम्हारा मुझे था बनाया कुमारी

चलो साथ मिल कर सफ़र ज़िन्दगी का
मुकम्मल करेंगे हमारा कुमारी

भला क्या पुकारूँ उसे चाँद कह कर
करे चाँद ख़ुद जिस का सज़दा कुमारी

हमें देख कर लोग सोचा करेंगे
कुमारी है कान्हा या कान्हा कुमारी

— Kanha Mohit

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