chhod aaya main use vo phir akela rah gaya | छोड़ आया मैं उसे वो फिर अकेला रह गया

  - Kanha Mohit

छोड़ आया मैं उसे वो फिर अकेला रह गया
गाँव में बूढ़ा पिता आखिर अकेला रह गया

सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए
देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया

'इश्क़ के बाज़ार में बोली दिलों की लग गई
बिक गए सस्ते मेरा नादिर अकेला रह गया

भक्त तेरे पूजते हैं तुझको देवी मानकर
सब पे तेरा ध्यान है काफ़िर अकेला रह गया

पेट सबका माँगता है एक दो ही रोटियाँसठ तो घर जा चुका क़ासिर अकेला रह गया

मज़हबी बातों के पीछे भाई भाई लड़ रहे
मस्जिदें तन्हा हुई मन्दिर अकेला रह गया

  - Kanha Mohit

Yaad Shayari

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