dil-e-khoon ko koii tasalli nahin hai | दिल-ए-खूँ को कोई तसल्ली नहीं है

  - Kanha Mohit

दिल-ए-खूँ को कोई तसल्ली नहीं है
दवा भी कोई काम आती नहीं है

समझता नहीं कोई रू-पोश का ग़म
उदासी की चादर उतरती नहीं है

तेरे साथ घूमा तो अच्छी लगी थी
बिना तेरे पहले सी दिल्ली नहीं है

ख़मोशी उदासी ख़ुमारी फ़क़ीरी
जवानी के जैसी जवानी नहीं है

तुम्हें ही गले से लगानी पड़ेगी
गले ख़ुद ही रस्सी लगाती नहीं है

गुज़रती हुमा सिर के ऊपर से लेकिन
शिकारी की फ़ितरत बदलती नहीं है

वो दीवार तस्वीर कमरा हमारा
पुकारें उसे पर वो आती नहीं है

गुलों की अना देख कर आज समझा
अना आप की फिर तो कुछ भी नहीं है

वो आएगी घर पर पड़ोसी कहेंगे
हमें गोर की जानकारी नहीं है

मुसव्विर तो मोहित भी अच्छा था लेकिन
तसव्वुर में तस्वीर उतरती नहीं है

  - Kanha Mohit

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