तेरे घर के ज़रा आगे जली सिगरेट
    न जाने फिर कहाँ कितनी चली सिगरेट

    कभी ग़म में कभी यारी में चल जाती
    न जाने कितनी तो घर में पली सिगरेट

    तुझे जाते समय भी बोला था मैंने
    कि तेरे बाद जो पी सब खली सिगरेट

    तेरी सूरत किसी दिन याद आई तो
    इन्हीं हाथों में रक्खी और मली सिगरेट

    कभी खींची कभी फेंकी कभी बाँटी
    मेरे अंदर बहुत फूली फली सिगरेट

    तुझे ग़ैरों की छत गलियाँ मुबारक हों
    मुझे तो बस मुबारक हो गली सिगरेट

    न तस्वीरें न वो बातें न कोई और
    तेरी ख़ातिर बहुत तड़पी भली सिगरेट

    अभी तक पीते हो तो छोड़ भी दो अब
    तुम्हारे तो रगों-जाँ में ढली सिगरेट

    नहीं कोई तुम्हारा 'शांतनु' पर फिर
    तुम्हारे तो गले लगकर चली सिगरेट
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    Shantanu Sharma
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    गरीबी में मुझे अच्छी समझ आई
    अकेले रह बड़ी जल्दी समझ आई

    नहीं आई समझ कोई मुझे पर जब
    लगा दिल तब सही लड़की समझ आई
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    Shantanu Sharma
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    चाँद‌ फिर सूरत बदल के‌ आसमाँ में आ चढ़ेगा
    राह देखेगा कही जब भूख से बेहाल कोई
    Shantanu Sharma
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    बड़ा आसान था तेरे लिए कहना
    रहो तुम साथ या फिर दूर मुझसे क्या
    Shantanu Sharma
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    कुछ न तेरा कुछ न मेरा रात है बस
    एक तू मैं और हाँ बरसात है बस
    Shantanu Sharma
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    ख़ूब जब बदनाम की सिगरेट मैंने
    एक तेरे नाम की सिगरेट मैंने

    छोड़ते हर रोज़ फिर हर रोज़ पीते
    लो जला ली शाम की सिगरेट मैंने
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    Shantanu Sharma
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    जो मुझे मिलना कभी तो चुप न रहना
    शांत लोगों से मुझे है ख़ौफ़ थोड़ा
    Shantanu Sharma
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    उस दिन जो मैंने उसकी बस आधी सी बात नहीं मानी
    उस दिन से फिर उसने मेरी कोई भी बात नहीं मानी
    Shantanu Sharma
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    थी ख़्वाहिशें तुझ से बहुत सारी मुझे
    थी ज़िंदगी तू कुछ बहुत प्यारी मुझे
    Shantanu Sharma
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    मेरी चाहत मेरा मान नहीं रखती
    अब ये क़िस्मत मेरा ध्यान नहीं रखती

    यूँ तो रखती है सब से मेरी यारी
    पर अब सब के आगे जान नहीं रखती
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    Shantanu Sharma
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