Shantanu Sharma

Shantanu Sharma

@shantanusharma

Shantanu Sharma shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shantanu Sharma's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Sher
  • Ghazal

दुनिया की आबादी में काफ़ी अकेले रह गए हम
इक तुम्हारे साथ थे फिर भी अकेले रह गए हम

Shantanu Sharma

पहली मुहब्बत की ख़ुशी लाएँ कहाँ से
दोबारा अब तुम जैसी ही लाएँ कहाँ से

तुम तो चलो दुख के बहाने साथ भी हो
और फिर हितैषी भी कोई लाएँ कहाँ से

Shantanu Sharma

बिगाड़ो मुझे अब सही से बचा भी नहीं हूँ
यूँ तो फिर कभी मैं किसी पर जचा भी नहीं हूँ

भरी दुनिया में हैं कलाकार ढेरों मगर फिर
कभी बनके मेंहदी किसी पर रचा भी नहीं हूँ

Shantanu Sharma

ज़िंदा था मैं तो कभी तब देखने आए मुझे
मर गया था मै तभी सब देखने आए मुझे

रोता था मैं हर दफ़ा बस जिनसे मिलने के लिए
जा चुका था मैं सभी जब देखने आए मुझे

Shantanu Sharma

एक मुफ़्लिस की कहानी का कलाकार
मर गया मेरी कहानी का कलाकार

Shantanu Sharma

ज़िंदगी जीने का बिल्कुल मन नहीं है
पास मेरे जो मेरा बचपन नहीं है

Shantanu Sharma

वो आँखें जो सब बातों पे नम हो जाती थीं
बस उन आँखों ख़ातिर सिगरेट कम हो जाती थीं

Shantanu Sharma

धुँआ सिगरेट का थोड़ा बहुत पलता रहा मुझमें
कई दिन रात उसका ख़्वाब बस जलता रहा मुझमें

गया वो बाँध कर अपनी सभी यादें मगर फिर भी
कई मुद्दत वही चेहरा कहीं चलता रहा मुझमें

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गरीबी में मुझे अच्छी समझ आई
अकेले रह बड़ी जल्दी समझ आई

नहीं आई समझ कोई मुझे पर जब
लगा दिल तब सही लड़की समझ आई

Shantanu Sharma
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मुहब्बत में कई सारी नहीं जानी
ख़ुदा की ये कलाकारी नहीं जानी

नहीं होता उसे मुझपर भरोसा क्यों
कहा हर रोज़ पर प्यारी नहीं जानी

Shantanu Sharma
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चाँद‌ फिर सूरत बदल के‌ आसमाँ में आ चढ़ेगा
राह देखेगा कही जब भूख से बेहाल कोई

Shantanu Sharma
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बड़ा आसान था तेरे लिए कहना
रहो तुम साथ या फिर दूर मुझसे क्या

Shantanu Sharma
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कुछ न तेरा कुछ न मेरा रात है बस
एक तू मैं और हाँ बरसात है बस

Shantanu Sharma
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ख़ूब जब बदनाम की सिगरेट मैंने
एक तेरे नाम की सिगरेट मैंने

छोड़ते हर रोज़ फिर हर रोज़ पीते
लो जला ली शाम की सिगरेट मैंने

Shantanu Sharma
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घर की सब जिम्मेदारी उस के ही काँधे पर हैं
फिर भी उस की आँखों में दो ही चहरे रहते हैं

Shantanu Sharma
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जो मुझे मिलना कभी तो चुप न रहना
शांत लोगों से मुझे है ख़ौफ़ थोड़ा

Shantanu Sharma
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अब तो सुनने को बस उसकी बातें काफ़ी हैं
मेरे रोने को अब बस ये रातें काफ़ी हैं

हम जो मरते थे बस उस से मिलने की ख़ातिर
अब मरने को दो रातें कुछ बातें काफ़ी हैं

Shantanu Sharma
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उस दिन जो मैंने उसकी बस आधी सी बात नहीं मानी
उस दिन से फिर उसने मेरी कोई भी बात नहीं मानी

Shantanu Sharma
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थी ख़्वाहिशें तुझ से बहुत सारी मुझे
थी ज़िंदगी तू कुछ बहुत प्यारी मुझे

Shantanu Sharma
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मेरी चाहत मेरा मान नहीं रखती
अब ये क़िस्मत मेरा ध्यान नहीं रखती

यूँ तो रखती है सब से मेरी यारी
पर अब सब के आगे जान नहीं रखती

Shantanu Sharma
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