
धुआँ सिगरेट का थोड़ा बहुत पलता रहा मुझ
में
कई दिन रात उस का ख़्वाब बस जलता रहा मुझ
में
गया वो बाँध कर अपनी सभी यादें मगर फिर भी
कई मुद्दत वही चेहरा कहीं चलता रहा मुझ
में
— Shantanu Sharma
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