इश्क़ में रोक टोक मत करो तुम
उस की भी अपनी एक ज़िंदगी है
उस की भी अपनी एक ज़िंदगी है
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ये मेरा ज़र्फ़ है जो मैं तिरा हूँ आज तलक
वरना बैठी हैं बहुत बस मिरी इक हाँ के लिए
वरना बैठी हैं बहुत बस मिरी इक हाँ के लिए
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ये दिल-ए-ज़ार आसमाँ न बना
रोज़ इक तारा टूट जाएगा
रोज़ इक तारा टूट जाएगा
ज़िंदगी कितनी भी समेट लो तुम
कुछ न कुछ फिर भी छूट जाएगा
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जो मिला तुझे वो क़ुबूल कर जो मिला नहीं उसे भूल जा
मुझे चाह थी मुझे वो मिले जो नहीं मिला मिरी राह में
मुझे चाह थी मुझे वो मिले जो नहीं मिला मिरी राह में
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कभी बारिश कभी साया कभी धूप
इसी का नाम यारों ज़िंदगी है
इसी का नाम यारों ज़िंदगी है
कहानी मोड़ पर कुछ ऐसे बदली
जो पहले जान थी अब अजनबी है
बरस जाएँगे मेरे लफ़्ज़ सारे
घटा के साथ ग़ज़लें भेज दी है
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किस जहाँ में तू बैठ कर देखता है मुझ को ख़ुदा
क्यूँ ज़मीं पर आ कर सभी ज़ख़्म मेरे भरता नहीं
क्यूँ ज़मीं पर आ कर सभी ज़ख़्म मेरे भरता नहीं
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वो मिलेंगे उस जहाँ के आसमाँ में
मिल न पाए जो परिंदे इस ज़मीं पर
मिल न पाए जो परिंदे इस ज़मीं पर
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