देख लो ख़ुद को रख के मेरी जगह
    बे-वफ़ा थोड़ा कम लगूँगा मैं
    Dharmesh Solanki
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    बताओ क्या करोगे मुझ से मिल कर
    मैं ख़ुद उस शख़्स से मिलता नहीं हूँ
    Dharmesh Solanki
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    रोज़ी-रोटी कमाया कर थोड़ी
    शाइरी क्या परोस कर देगी?
    Dharmesh Solanki
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    चुप-चाप बैठे रहते हैं अब तो अपने घर में
    होली तो पहले खेला करते थे यार हम लोग
    Dharmesh Solanki
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    ये अब सहा नहीं जाता कि इक ही महफ़िल में
    रहे तू और मैं फिर भी हमारी बात न हो
    Dharmesh Solanki
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    मर गया होता तिरी शादी से पहले
    गर न होती मुझ पे घर की ज़िम्मेदारी
    Dharmesh Solanki
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    जल्द-बाज़ी न करना चमकने में दोस्त
    रात में कोई सूरज निकलता नहीं
    Dharmesh Solanki
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    हमेशा हँसती रहो ख़ुश रहो दुखी न रहो
    कली हो खिलती हुई तुम बुझी बुझी न रहो
    Dharmesh Solanki
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    बता भी दो ज़रा तुम मेरा दिल कब तक दुखाओगे
    कभी मिलने भी आओगे कि बस यूँही रुलाओगे
    Dharmesh Solanki
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    शाम होते जब तुम आई याद तो मैं रो पड़ा
    तुम को खो कर जब हुआ बर्बाद तो मैं रो पड़ा
    Dharmesh Solanki
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