Abhishek Baba

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    तितलियों की देख कर के बे-हिसी
    छोड़ दी फूलों ने अपनी ताज़गी

    फूल भी मुरझा रहे हैं बीच में
    डायरी में शाइरी है ज़ात की

    अब न पूछो मैं कहाँ हूँ आज कल
    किस तरह से हो रही है शाइरी

    इश्क़ के पौधे लगाने हैं मुझे
    है बचानी आशिक़ी और साँस भी

    सोचता हूँ बात कर लूँ आपसे
    आपकी कैसी है अब नाराज़गी

    रात मेरी पहले से है पुर-ख़तर
    उस पे फिर नाज़िल हैं यादें आपकी
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    Abhishek Baba
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    रौशनी जो नहीं चाँदनी रात में
    मुझसे होगी नहीं शाइरी रात में

    बल्ब की रौशनी है मगर ढूँढना
    जुगनुओं की मुझे ज़िंदगी रात में

    इश्क़ में रातों-दिन हैं इबादत के पर
    मुझसे होती नहीं बंदगी रात में

    इतना रोया है वो हिज्र की रात को
    उससे होती नहीं दिल्लगी रात में
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    Abhishek Baba
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    बाद मेरे मरने के फिर किसे सज़ा दोगे
    अपनी इन जफ़ाओं से फिर किसे क़ज़ा दोगे

    मेरी झील का पानी फीका है तो रहने दो
    अपने लम्स से इस को शीरीं तुम बना दोगे

    साँस थाम कर है जो मुंतज़िर तेरा आशिक़
    मर गया तो क्या उसको क़ब्र से उठा दोगे

    मैं ने तो न देना ये इम्तिहान दोबारा
    इश्क़ का जो पेपर तुम ज़ात का बना दोगे

    जीने-मरने की क़समें कहने भर की बातें हैं
    बस दो चार दिन में ही मुझ को तुम भुला दोगे
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    Abhishek Baba
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    मेरे तो साथ बस बस रहे हो
    बोल के मीठा बस रस रहे हो

    साप की बाँबी ये मसअला भी
    ज़ात बस ज़ात कह डस रहे हो

    यार नाज़ुक है नब्ज़ों की हालत
    आप फंदा ही क्यों कस रहे हो

    इतनी बारीकी अच्छी नहीं है
    बालों में ढूंढ तुम नस रहे हो
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    शहर में तेरे कमरा किराए का बस
    चाहता हूँ मैं मेरा हो घर भी यहाँ
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    कहा जैसे ही हमने ख़ुद को सितमगर
    गया वैसे ही दरिया को पी समुन्दर

    ये सब चाह कर भी मैं भूलूँ तो कैसे
    मिरा जन्मदिन शादी फिर ये दिसंबर
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    मेरी नज़रों में वो तर गया है
    ख़ूनी का ख़ून जो कर गया है

    जिस्म की भूख बस अब बची है
    प्यार का भूत तो मर गया है

    जा मिला तब समुंदर को शातिर
    शहर जब पूरा बस भर गया है

    छत को पक्की बनाने हो वाले
    तू भी कच्ची से बस डर गया है

    पूछो मत इश्क़ की तुम तबीयत
    चार कंधों में वो घर गया है

    बस ख़बर आई उसके ही हिस्से
    बेटा था जिसका भी मर गया है
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    Abhishek Baba
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    आपने जैसे ही जाना है
    मौत ने मुझको बस खाना है

    इक किराये का बस घर ही है
    आपने महँगे घर जाना है

    हमको पागल तो करना नहीं
    उसने करके ही तो माना है

    प्यार में प्यार मुश्किल है ये
    जिस्म तो आपका दाना है

    रात की बातें किससे करूँ
    आपने जल्दी सो जाना है

    ख़ैर ये बातें छोड़ो भी अब
    कौन सा उसको अब आना है
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    Abhishek Baba
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    वैसे तो चुप सहता है
    शेरों में बस रहता है

    लिखते लिखते रो देता
    हँसते हँसते कहता है
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    Abhishek Baba
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    ये कमरे की चार दिवारी
    है पंखे पे लाश हमारी

    ये बिस्तर में खू़न के काग़ज़
    थी इक तरफा़ इश्क़ बिमारी
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    Abhishek Baba
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