तेरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ
हसीना ख़ुद-कुशी की इतनी दिलकश
हसीना ख़ुद-कुशी की इतनी दिलकश
10
1 Like
तितलियों की देख कर के बे-हिसी
छोड़ दी फूलों ने अपनी ताज़गी
छोड़ दी फूलों ने अपनी ताज़गी
फूल भी मुरझा रहे हैं बीच में
डाइरी में शा'इरी है ज़ात की
अब न पूछो मैं कहाँ हूँ आज कल
किस तरह से हो रही है शा'इरी
इश्क़ के पौधे लगाने हैं मुझे
है बचानी आशिक़ी और साँस भी
सोचता हूँ बात कर लूँ आपसे
आप की कैसी है अब नाराज़गी
रात मेरी पहले से है पुर-ख़तर
उस पे फिर नाज़िल हैं यादें आप की
9
1 Like
8
1 Like
मेरी झील का पानी फीका है तो रहने दो
अपने लम्स से इस को शीरीं तुम बना दोगे
साँस थाम कर है जो मुंतज़िर तेरा आशिक़
मर गया तो क्या उस को क़ब्र से उठा दोगे
मैं ने तो न देना ये इम्तिहान दोबारा
इश्क़ का जो पेपर तुम ज़ात का बना दोगे
जीने-मरने की क़स
में कहने भर की बातें हैं
बस दो चार दिन में ही मुझ को तुम भुला दोगे
7
1 Like
6
2 Likes
कहा जैसे ही हम ने ख़ुद को सितमगर
गया वैसे ही दरिया को पी समुन्दर
गया वैसे ही दरिया को पी समुन्दर
ये सब चाह कर भी मैं भूलूँ तो कैसे
मिरा जन्मदिन शादी फिर ये दिसंबर
4
5 Likes
मेरी नज़रों में वो तर गया है
ख़ूनी का ख़ून जो कर गया है
ख़ूनी का ख़ून जो कर गया है
जिस्म की भूख बस अब बची है
प्यार का भूत तो मर गया है
जा मिला तब समुंदर को शातिर
शहर जब पूरा बस भर गया है
छत को पक्की बनाने हो वाले
तू भी कच्ची से बस डर गया है
पूछो मत इश्क़ की तुम तबीयत
चार कंधों में वो घर गया है
बस ख़बर आई उस के ही हिस्से
बेटा था जिस का भी मर गया है
3
2 Likes
2
2 Likes
1
2 Likes










