hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Top 10 of
Amaan Javed
Top 10 of
Amaan Javed
मुझे
इतनी
मुहब्बत
हो
चुकी
है
कि
मिल
पाने
की
हिम्मत
खो
गई
है
मेरा
दिल
है
अमावस
का
अँधेरा
तुम्हारी
याद
जैसे
चाँदनी
है
मैं
तुम
से
ले
सकूँ
कोई
इजाज़त
मुझे
इतनी
इजाज़त
कब
मिली
है
मिटा
दे
वहशतों
को
ज़िंदगी
से
तुम्हारे
हुस्न
में
वो
ताज़गी
है
मेरी
आँखों
को
ठंडक
दे
गई
है
तेरी
मुस्कान
में
जो
चाँदनी
है
तुम्हें
तो
हक़
भी
है
सब
भूलने
का
मेरा
तो
याद
करना
लाज़मी
है
जो
सब
कुछ
चाहिए
था
पा
लिया
है
मगर
तेरी
कसक
तो
रह
गई
है
तुम्हारा
दिल
अगर
अब
भी
न
पिघले
तो
फिर
किस
काम
की
ये
शा'इरी
है
मुझे
मालूम
है
तुम
क्या
कहोगी
ज़रा
सा
वाह
लिखना
बेरुख़ी
है
तेरा
होना
तेरा
मिलना
ग़ज़ब
है
ये
सब
महसूस
करना
जादुई
है
मुझे
ये
रात
छोटी
लग
रही
है
ग़ज़ल
ये
लंबी
होती
जा
रही
है
-अमान
Read Full
Amaan Javed
10
Download Image
0 Likes
हुस्न
की
तौहीन
कर
दी
वक़्त
की
बर्बादी
की
तेरे
ठुकराए
हुओ
ने
किस
सेे
किस
सेे
शादी
की
Amaan Javed
9
Send
Download Image
0 Likes
जिस
चीज़
को
छुआ
उधर
गुलाब
खिल
गए
उनके
क़दम
गए
जिधर
गुलाब
खिल
गए
Amaan Javed
8
Send
Download Image
0 Likes
टूटे
हुए
तारे
मेरी
खिड़की
से
गुज़रना
इक
बात
को
करना
है
मुक़द्दर
के
हवाले
Amaan Javed
7
Send
Download Image
1 Like
अब
मुझे
फ़ारिग़
करो
तुम
अपनी
यादों
से
कोई
आया
है
मेरा
बनने
मेरे
घर
में
Amaan Javed
6
Send
Download Image
1 Like
उम्मीद
किसी
को
कभी
झूठी
नहीं
दी
है
सब
कुछ
दिया
तोहफ़े
में
अँगूठी
नहीं
दी
है
Amaan Javed
5
Send
Download Image
1 Like
बे-दर्द
सियासत
ने
ज़हनों
पर
कैसा
पर्दा
डाल
दिया
हम
डूब
रहे
हैं
दलदल
में
और
देख
रहे
आतिशबाज़ी
Amaan Javed
4
Send
Download Image
2 Likes
बड़े
हो
कर
समझदारी
तो
मुझ
को
आ
गई
लेकिन
वो
लड़का
खो
गया
जो
ख़ुशबुओं
से
बात
करता
था
Amaan Javed
3
Send
Download Image
2 Likes
फूँक
देने
मेरे
ख़्वाबों
का
नगर
आ
ही
गई
इस
दिसम्बर
तेरी
शादी
की
ख़बर
आ
ही
गई
Amaan Javed
2
Send
Download Image
12 Likes
त'अल्लुक़
आज़माइश
से
रहा
है
ज़िंदगी
भर
यूँँ
जहाँ
पहुँचे
मेरा
लशकर
वो
दरिया
सूख
जाता
है
Amaan Javed
1
Send
Download Image
1 Like
Get Shayari on your Whatsapp
Radheshyam Tiwari
Saniya Tasnim
MOHSIN JAHANGIR
Shadab Shabbiri
Haresh vanza
Mohammad Bilal
Faiz Ahmad
Karan Sahar
Mukesh Jha
Sristi Singh