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निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी
वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
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ख़मोशी चूमता है सुर्ख़ होंठों से
सो उस के आने पे चुप्पी सजाई है
सो उस के आने पे चुप्पी सजाई है
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वफ़ा में आग लग जाए तो अच्छा है
हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
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जब मुसलसल दुखों का समुंदर बहे
ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
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