Sristi Singh

Top 10 of Sristi Singh

    याद आती है तेरी रुस्वाई
    मौसमों की हसीन पुरवाई

    उन दिनों मुझ
    में तुम फ़क़त तुम थे
    आज मुझ
    में है बस ये तन्हाई
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    Sristi Singh
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    मुझ को हर ख़ौफ़ से रिहा कर दो
    या तो फिर शाख़ से हरा कर दो

    रोज़ उस की ही याद आती है
    कुछ नया तुम ही हादसा कर दो

    ज़ख़्म सबके ख़रीद लूँगी मैं
    गर उसे मेरा हमनवा कर दो

    ऐसे क़ातिल को क्या कहेंगे हम
    जाने दो उस को तुम रिहा कर दो

    गाहे गाहे मैं मुस्कुराती हूँ
    मुझ को हर पल का ग़म-ज़दा कर दो
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    Sristi Singh
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    निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी
    वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
    Sristi Singh
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    टूट जाएँ अगर ये खिलौने अभी
    रो पड़ेंगे ज़मीं के फ़रिश्ते अभी

    देखते हो तो क्या देखते हो भला
    थक गए राह घर ये दरीचे अभी

    लाख ग़म को सँभालू सँभलते नहीं
    दस्तरस में नहीं हैं उजाले अभी
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    Sristi Singh
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    ख़मोशी चूमता है सुर्ख़ होंठों से
    सो उस के आने पे चुप्पी सजाई है
    Sristi Singh
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    वफ़ा में आग लग जाए तो अच्छा है
    हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
    Sristi Singh
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    सभी के दिलों में कसक सी उठी है
    कि क्यूँ आँख उस की चमक सी उठी है

    कोई खिड़कियाँ खटखटा कर गया है
    मिरी चूड़ियों में खनक सी उठी है

    वही इश्क़ फिर शोर क्यूँ कर रहा है
    बुझी आग फिर क्यूँ दहक सी उठी है

    तिरे लम्स का है अभी तक असर जाँ
    बदन से मिरे कुछ महक सी उठी है
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    Sristi Singh
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    जब मुसलसल दुखों का समुंदर बहे
    ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
    Sristi Singh
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