Dard Faiz Khan

Top 10 of Dard Faiz Khan

    क़ैस ने माना कि सहरा देखा है
    आग का हमने भी दरिया देखा है

    आमद-ओ-शुद, सा'अत-ए- हिज्र-ओ-विसाल
    मेरी इन आँखों ने क्या क्या देखा है

    दुःख किसी का कोई कैसे समझे जब
    सब ने बस अपना ही अपना देखा है

    यूँ नहीं होता किसी का कोई भी
    ख़ुद को जैसे तेरा होता देखा है

    मैंने अपने दिल को सीने में नहीं
    ग़ैर के पहलू में धड़का देखा है

    रंज, धोखे सब मिले तेरे सबब
    मैंने हरदम ख़ुद को तन्हा देखा है

    ज़ब्त का दावा था जिनको इश्क़ में
    आज मैंने उन को रोता देखा है

    मुझसे मिलने आए हैं वो मेरे घर
    फ़ैज़ मैंने कैसा सपना देखा है
    Read Full
    Dard Faiz Khan
    1 Like
    शेर होंटों पे रक़्स करते हैं
    हो अगर कोई हादसा मुझ में
    Dard Faiz Khan
    1 Like
    अपनी दुनिया बसा रहा हूँ मैं
    जा तुझे अब भुला रहा हूँ मैं

    आज की शब बड़ी क़यामत है
    वाक़ई सोने जा रहा हूँ मैं

    हाँ मुहब्बत कभी नहीं मिटती
    ख़ुद को लेकिन मिटा रहा हूँ मैं

    उस की ख़ुशीयों के वास्ते लोगों
    बार ए ग़म भी उठा रहा हूँ मैं

    या ख़ुदा सुन ले इल्तिजा मेरी
    दर तिरा खटखटा रहा हूँ मैं

    ये धुआँ बे सबब नहीं उठता
    अपना सीना जला रहा हूँ मैं

    फ़ैज़ उर्दू अदब की दुनिया में
    अपना जलवा दिखा रहा हूँ मैं
    Read Full
    Dard Faiz Khan
    2 Likes
    उनकी औक़ात से बाहर वो नज़र आता है
    जिनके शे'रों में हुआ करता है गहराई का माल

    ऐसे लोगों पे निगाहें मैं सदा रखता हूंँ
    जिनकी जेबों में भरा रहता है सप्लाई का माल
    Read Full
    Dard Faiz Khan
    2 Likes
    ख़ुद-ब-ख़ुद मंज़िल तिरे क़दमों में चल कर आएगी
    हौसला तेरा अगर शम्स-ओ-क़मर तक जाएगा
    Dard Faiz Khan
    3 Likes
    आज तेरा है लगन और मेरी बर्बादी है
    ये जनमदिन है मेरा और तेरी शादी है
    Dard Faiz Khan
    3 Likes
    यार तू मुझ को अब तलाश न कर
    इश्क़ में फिर से खो गया हूॅं मैं
    Dard Faiz Khan
    4 Likes
    तुम्हारी याद में आँखें भिगो रहा हूँ मैं
    मगर ज़माना समझता है रो रहा हूँ मैं

    कमाल ये है कि ख़ुद अपने दिल के तारों में
    हसीन इश्क़ के मोती पिरो रहा हूँ मैं

    कटी है उम्र ये सारी बुतों की उल्फ़त में
    मगर अब अपने गुनाहों को धो रहा हूँ मैं

    मेरे यक़ीन का इस से ही इम्तिहाँ होगा
    भँवर में इश्क़ के कश्ती डुबो रहा हूँ मैं

    मिले तो उस को निशानी वो दूँ मोहब्बत की
    उठा के शाने पे अपने जो ढो रहा हूँ मैं

    ख़्याल आबला-पाई है हर क़दम मुझ को
    सो अपनी राह में काँटे बो रहा हूँ मैं

    लगा रहे हैं वो मेंहदी ख़ुशी की हाथों में
    सुकून दिल का मगर फैज़ खो रहा हूँ मैं
    Read Full
    Dard Faiz Khan
    3 Likes
    मुझ को इस मोड़ पर छोड़ जाने के बाद
    क्या मिले गा तुझे दिल दुखाने के बाद

    चेहरे अहबाब के फिर उतरने लगे
    जब हँसे हम कभी ग़म छुपाने के बाद

    रिज़्क़ के वास्ते घर से निकला था मैं
    दिल मसर्रत में है कुछ कमाने के बाद

    ज़िंदगी की हक़ीक़त समझ आ गई
    बारिशों में पतंगें उड़ाने के बाद

    देख ले जा के तारीख़ ए कर्बो बला
    और ऊँचा हुआ सर कटाने के बाद

    ऐसा बिखरा हुआ है तिरा फैज़ अब
    जैसे शीशा कोई टूट जाने के बाद
    Read Full
    Dard Faiz Khan
    1 Like
    जिन के होते हुए अँधेरा हो
    लाख लानत हो उन चराग़ों पर
    Dard Faiz Khan
    3 Likes

Top 10 of Similar Writers