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मेरी ख़्वाहिश है एक बेटी होनाम जिसका सना रखूँगा मैं
मैं जो दिल से उतर गया होताइतना पीता के मर गया होता
मौत का नाम क्या सुना मैंनेजिस्म जैसे पिघल गया मेरा
एक ही शख़्स के कई चेहरेऔर सब पे नक़ाब है देखो
हमारे पास है दौलत जुदाई कीतुम्हारे पास शोहरत बेवफ़ाई की
इस तरह से ना देख तू मुझकोइस तरह देखना नहीं अच्छा
ढल चुकी है शाम भी अपनीहो इजाज़त तो चलूं घर को
साँस चलती भी नहीं हैदम निकलता भी नहीं हैएक दिल है पास मेरेदिल सँभलता भी नहीं है
समन्दर के किनारे बैठ कर साबिरग़ज़ल लिखते रहें हैं याद में तेरी
अदब क्या है कहाँ है पूछते हो तोअदब ही शायरी है पूछ लो दिल से