Manohar Shimpi

Top 10 of Manohar Shimpi

    देखे उसी के ख़्वाब थे क्या काम के
    बाक़ी अभी चर्चे रहे बस नाम के
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    सफ़र में मैं न तन्हा था दुआओं से
    हुआ हूँ मुतमइन तेरी वफ़ाओं से
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    कभी मासूम बच्चों को कहीं रोते हुए देखा
    किसी उनके क़रीबी को कभी खोते हुए देखा

    सियासत तो बहुत होती गहन गंभीर मुद्दों पर
    किसी का बोझ नेता को न ही ढ़ोते हुए देखा

    किसी उम्मीद की कोई किरण से ही किसी को फ़िर
    मुसलसल ही बिखरकर फिर खड़े होते हुए देखा

    यहाँ दौलत यहाँ शोहरत कहाँ मिलती किसी को भी
    उसे पाने यहाँ पर फिर बहुत खोते हुए देखा

    मिज़ाजी को नशा कोई नशे में ही डुबा देता
    उसे फिर डूबते गिरते कहीं सोते हुए देखा
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    तुझे आसमाँ में न हम देखते हैं
    ज़मीं पर कहीं क्यों सितम देखते हैं

    ज़मीं पर करिश्मे कहीं देखते हैं
    उसी में कभी हम मनम देखते हैं

    फ़िज़ाएँ अदाएँ सभी देखते हैं
    निगाह-ए-करम फिर सनम देखते हैं

    किसी काम से क्यों किसे सोचते हैं
    ग़लत सोच से हम भरम देखते हैं

    हमेशा सफ़र में तुझे याद करते
    तुझे सोच के फिर करम देखते हैं

    सफ़र में अकेले हमीं तो चले हैं
    हमारे न नक़्शे क़दम देखते हैं

    तरक्की हमीं जब कभी देखते हैं
    ख़ुशी से उसी में करम देखते हैं
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    कभी तकरार थोड़ी सी मुहब्बत में ज़रुरी है
    अगर है इश्क़ गहरा फिर वो गहराई उसी में हो
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    कभी थी ज़ेहन में मेरे अभी दिल में बसी है मेरे
    अगर दिल ही दिया उसको 'मनोहर' तो सुनो ना दिल की
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    ज़ेहन में है मुलाक़ात तेरी
    याद है आज भी बात तेरी

    इत्र जैसे महक ख़ूब आती
    तेज़ जब तू करे बात तेरी

    याद तू ख़ूब आती मुझे ही
    फिर न भूलूँ हसीं रात तेरी

    क्यों झुकी थी तभी वो निगाहें
    बेज़ुबाँ तो न थी बात तेरी

    चंद लम्हें लगे सिर्फ़ मिलने
    हिज्र में क्यों कटी रात तेरी

    दूर रहके यहीं है लगे तू
    कब सुनी पास से बात तेरी

    अब न कोई मुलाक़ात बातें
    लफ़्ज़ थामे रहें बात तेरी

    देखते ही रहा ख़ामुशी से
    शाम-ए-ग़म से भरी रात तेरी

    ख़्वाब ऐसे मनोहर न देखे
    वक़्त-बे-वक़्त बारात तेरी
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    कसक कोई जो दिल में है कहीं बाक़ी न वो रह जाए
    न जाने कोई लम्हा फिर न अश्कों में कहीं बह जाए
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    अपना क़िस्सा ही कहते हो
    फिर भी ग़मगीं क्यों रहते हो

    अक्सर ग़लती करके भी क्यों
    फिर कैसे चुप ही रहते हो

    बातें सुनते कैसी कैसी
    उन बातों में क्यों बहते हो

    अपनी कमियाँ ही बतलाकर
    तानें लोगों के सहते हो

    बदले मौसम को तो समझो
    अक्सर उलझे क्यों रहते हो
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    Manohar Shimpi
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    इत्तिफ़ाक़न कहाँ तू मुझे है मिली
    मुद्दतों बाद जैसे कली है खिली
    Manohar Shimpi
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