zehan men hai mulaqaat teri | ज़ेहन में है मुलाक़ात तेरी

  - Manohar Shimpi

ज़ेहन में है मुलाक़ात तेरी
याद है आज भी बात तेरी

इत्र जैसे महक ख़ूब आती
तेज़ जब तू करे बात तेरी

याद तू ख़ूब आती मुझे ही
फिर न भूलूँ हसीं रात तेरी

क्यूँ झुकी थी तभी वो निगाहें
बेज़ुबाँ तो न थी बात तेरी

चंद लम्हें लगे सिर्फ़ मिलने
हिज्र में क्यूँ कटी रात तेरी

दूर रहके यहीं है लगे तू
कब सुनी पास से बात तेरी

अब न कोई मुलाक़ात बातें
लफ़्ज़ था
में रहें बात तेरी

देखते ही रहा ख़ामुशी से
शाम-ए-ग़म से भरी रात तेरी

ख़्वाब ऐसे मनोहर न देखे
वक़्त-बे-वक़्त बारात तेरी

  - Manohar Shimpi

Khamoshi Shayari

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