मैं नहीं कहता कि अपनी जान समझो
हाँ मगर इंसान को इंसान समझो
हाँ मगर इंसान को इंसान समझो
गर तुम्हारी मुझ से अब बनती नहीं है
फिर मुझे तुम आज से अंजान समझो
जो बचा है वो बचा है दोस्तों का
दोस्तो तुम ये मेरा ऐलान समझो
राजनेता की शिकायत अफ़सरों से
अफ़सरों को इनका ही दरबान समझो
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लोग कहते हैं कि बेहतर हो गया हूँ
सच मगर ये है कि पत्थर हो गया हूँ
सच मगर ये है कि पत्थर हो गया हूँ
हूँ लगा मैं आज भी तो सीढ़ियों पर
कहने को ही संग-ए-मरमर हो गया हूँ
मैं न जानूँ क्या वजह है ज़िंदगी की
मौत से भी मैं तो बदतर हो गया हूँ
दूर रहते हैं सभी अब मीठे दरिया
खारे पानी का समुंदर हो गया हूँ
जैसे चाहे वो नचाता है मुझे तो
उस मदारी का मैं बंदर हो गया हूँ
वो कहानी जब पढ़ी तो जान पाया
तुम सुधा सी और मैं चंदर हो गया हूँ
सब जहाँ के गुल खिला बैठे 'गुरू' तुम
और कहते हो कि बंजर हो गया हूँ
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चाँद के आगे से बादल हटा दूँ क्यूँ प्यारे
आँखों का देखा मैं सब को जता दूँ क्यूँ प्यारे
Read Fullआँखों का देखा मैं सब को जता दूँ क्यूँ प्यारे
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कुछ न पाओगे मेरे ख़िलाफ़ इन सुबूतों से तुम
मैं ने जो कुछ कहा है मैं फिर से भी कह सकता हूँ
मैं ने जो कुछ कहा है मैं फिर से भी कह सकता हूँ
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ये मेहनत की कहानी का ख़ज़ाना है
मोहब्बत में जवानी को लुटाना है
मोहब्बत में जवानी को लुटाना है
दिखाओ मत मोहब्बत के महल हम को
हमें तो गाँव बस माँझी के जाना है
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छेड़ो न मुझ को मैं हारा हुआ हूँ
कमसिन हसीनों का मारा हुआ हूँ
कमसिन हसीनों का मारा हुआ हूँ
इक वक़्त दोनों जहाॅं चूमता था
जबरन फ़लक से उतारा हुआ हूँ
वो मेरी पूरी हयाती थी लेकिन
मैं पल जो रो कर गुज़ारा हुआ हूँ
ता'उम्र मैं एक ज़र्रा था लेकिन
अब मैं भी अंबर का तारा हुआ हूँ
कर ख़ून मेरा वो ख़ुश है तो फिर मैं
क्यूँ रोऊॅं गर उस का मारा हुआ हूँ
जाओ तुम इक इक गली पूछ आओ
कितनों से बचकर तुम्हारा हुआ हूँ
अब मैं किसी का सहारा हुआ हूँ
शाइ'र तो मैं फिर दोबारा हुआ हूँ
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