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चाहे हो आसमान पे चाहे ज़मीं पे होवहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे होदिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थीफिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो
इसीलिए तो हिफ़ाज़त में बैठा रहता हूँमेरे बदन में कोई नीम जान रहता है
मैं दर्द की ज़मीं पे गुहर ढूँढता रहावो आई और इश्क़ का इज़हार कर गई
पता करो कि रक़ीबों से मिल रहा है क्यावो आज कल जो बहुत मेहरबान रहता है
दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो।
क़ज़ा से कह दो कहीं और ही क़याम करे लगेगा वक़्त मुझे, मैं किसी के प्यार में हूँ
तेरे होंटों से छलकती है किरन सूरज की तेरे हंसने से मेरी सुबह चमक उठती है
तेरे बग़ैर गवारा नहीं बहिश्त मुझे मैं पुल सिरात पे बैठा हूँ इंतज़ार में हूँ
जान से जाते रहे जान से जाना न गया दिल गया इश्क़ में पर दिल का लगाना न गया
जब तलक छत पे मेरी जान खड़ी रहती है चांद की आबरू ख़तरे में पड़ी रहती है