चाहे हो आसमान पे चाहे ज़मीं पे हो
वहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे हो
वहशत का रक़्स हम ही करेंगे कहीं पे हो
दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी
फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो
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मैं दर्द की ज़मीं पे गुहर ढूँढ़ता रहा
वो आई और इश्क़ का इज़हार कर गई
वो आई और इश्क़ का इज़हार कर गई
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पता करो कि रक़ीबों से मिल रहा है क्या
वो आज कल जो बहुत मेहरबान रहता है
वो आज कल जो बहुत मेहरबान रहता है
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दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी
फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो।
फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो।
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क़ज़ा से कह दो कहीं और ही क़याम करे
लगेगा वक़्त मुझे, मैं किसी के प्यार में हूँ
लगेगा वक़्त मुझे, मैं किसी के प्यार में हूँ
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जान से जाते रहे जान से जाना न गया
दिल गया इश्क़ में पर दिल का लगाना न गया
दिल गया इश्क़ में पर दिल का लगाना न गया
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जब तलक छत पे मेरी जान खड़ी रहती है
चाँद की आबरू ख़तरे में पड़ी रहती है
चाँद की आबरू ख़तरे में पड़ी रहती है
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