Nirmal Nadeem

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Nirmal Nadeem shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nirmal Nadeem's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

Sher

मैं दर्द की ज़मीं पे गुहर ढूँढ़ता रहा वो आई और इश्क़ का इज़हार कर गई — Nirmal Nadeem
पता करो कि रक़ीबों से मिल रहा है क्या वो आज कल जो बहुत मेहरबान रहता है — Nirmal Nadeem
क़ज़ा से कह दो कहीं और ही क़याम करे लगेगा वक़्त मुझे, मैं किसी के प्यार में हूँ — Nirmal Nadeem
तुम ने होंटों पे तबस्सुम जो सजा रक्खा है होश मग़रूर गुलाबों का उड़ा रक्खा है — Nirmal Nadeem
जान से जाते रहे जान से जाना न गया दिल गया इश्क़ में पर दिल का लगाना न गया — Nirmal Nadeem
गुलों का रंग न वो चाँदनी का साया था हमारे ख़्वाब में कल रात तू ही आया था — Nirmal Nadeem
अपने सीने से लगाकर जो तेरा ग़म रक्खा दिल की मिट्टी को हमेशा ही मुलायम रक्खा — Nirmal Nadeem
इसीलिए तो हिफ़ाज़त में बैठा रहता हूँ मेरे बदन में कोई नीम जान रहता है — Nirmal Nadeem
फेंक आए हैं जहाँँ पे दियों को बुझा के हम देखो कहीं न ऐसा हो सूरज वहीं पे हो — Nirmal Nadeem
दिल पर तुम्हारे नाम की तख़्ती लगी न थी फिर भी ज़माना जान गया तुम यहीं पे हो। — Nirmal Nadeem
तेरे होंटों से छलकती है किरन सूरज की तेरे हँसने से मेरी सुब्ह चमक उठती है — Nirmal Nadeem
तेरे बग़ैर गवारा नहीं बहिश्त मुझे मैं पुल सिरात पे बैठा हूँ इंतिज़ार में हूँ — Nirmal Nadeem
जब तलक छत पे मेरी जान खड़ी रहती है चाँद की आबरू ख़तरे में पड़ी रहती है — Nirmal Nadeem
उस के दर पर वहशतों का रक़्स तो जारी रखो इम्तिहाँ हो या न हो पर अपनी तैयारी रखो — Nirmal Nadeem

Ghazal

वफ़ा की राह में दुश्वारियाँ बहुत सी हैं मगर जुनूँ की भी तय्यारियाँ बहुत सी हैं जलाल अपनी मोहब्बत का सब से ऊँचा है बदन में ऐसे तो बीमारियाँ बहुत सी हैं हमारे पास फ़क़त दिल का दर्द है लेकिन तुम्हारे पास तो अय्यारियाँ बहुत सी हैं हर एक शख़्स की फ़िक्रें जुदा जुदा ठहरीं जहान-ए-आम में ख़ुद्दारियाँ बहुत सी हैं वफ़ा की सारी मिसालें गिना तो दूँ लेकिन वतन में अपने भी ग़द्दारियाँ बहुत सी हैं दिलों में पलते हुए ख़्वाब जानते ही नहीं तबाह करने को बे-कारियाँ बहुत सी हैं किसी ने मुझ से कहा था कि यार सुन तो सही अदा में हुस्न की मक्कारियाँ बहुत सी हैं सजी है बज़्म-ए-मोहब्बत ये जान किस के लिए यहाँ तो लोगों में बेज़ारियाँ बहुत सी हैं 'नदीम' क्यूँँ तू तह-ए-इज़्तिराब डूब गया दिलों के खेल में भी पारियाँ बहुत सी हैं — Nirmal Nadeem
उक्ता के कू-ए-यार से उश्शाक़ चल पड़े कार-ए-वफ़ा के देखिए मुश्ताक़ चल पड़े मैं उठ गया तो दर्द की महफ़िल उजड़ गई मेरे ही साथ इश्क़ के मश्शाक़ चल पड़े नक़्श-ए-क़दम पड़े हैं ये क़ुदरत के जा-ब-जा दुनिया-ए-दिल से उठ के बद-अख़लाक़ चल पड़े बर्ग-ए-हिना से लिख के नसीहत ज़मीन पर गुलशन को तेरे छोड़ के औराक़ चल पड़े रिश्तों के एहतिराम की जिन को न थी तमीज़ दामन में अपने बाँध के आफ़ाक़ चल पड़े तेरी निगाह-ए-नाज़ ने ऐसा फ़ुसूँ पढ़ा दीवाने हो के दुनिया से अशफ़ाक़ चल पड़े मैं ने चराग़-ए-इश्क़ जलाए थे जो 'नदीम' हमराह मेरे छोड़ के सब ताक़ चल पड़े — Nirmal Nadeem
सहन ए गुलशन में कभी जब भी तेरा नाम लिया बढ़ के मुँह बा'द ए बहारी ने मेरा थाम लिया राह ए दिल में भी गवारा न हुई ख़ामोशी फ़ैसला जो भी लिया मैं ने बहंगाम लिया मेरे हाथों की लकीरों में चमक भर आई तेरे क़दमों को हथेली पे ही जब थाम लिया मिट गई प्यास फ़रिश्तों की भी सदियों के लिए मैं ने जब दस्त ए हिनाई से तेरे जाम लिया मेरी इस दरिया दिली पर हों दो आलम क़ुर्बान अक़्ल होते हुए भी दिल से सदा काम लिया अपनी क़िस्मत पे सितारों ने बहाए आँसू मैं ने बोसा जो कभी तेरा लब ए बाम लिया सुब्ह सूरज जो तबस्सुम से तेरे चमका था मैं ने वो सारा हिसाब उस सेे सर ए शाम लिया मुझ को काफ़िर वो कहें या कि बिरहमन मानें मैं ने तो तेरी इबादत की तेरा नाम लिया इतनी चाहत थी तेरी दीद की आँखों में नदीम मेरी पलकों ने तमाम उम्र न आराम लिया — Nirmal Nadeem
क्या हुआ क्यूँँ हुआ किस लिए क्या ख़बर जो हुआ सो हुआ तू उसे भूल जा जाग कर रात भर हो गई है सहर अब न ख़ुद को जला तू उसे भूल जा कौन आया यहाँ चल पड़ीं आँधियाँ कौन वीरान कर के गया गुल्सिताँ किस ने रख दीं लब-ए-गुल पे चिंगारियाँ ये किसे है पता तू उसे भूल जा रात की बात थी फिर सहर हो गई वक़्त चलता रहा दोपहर हो गई शाम आने को है रात छाने को है बिखरे सपने उठा तू उसे भूल जा हम-नवा हम-सफ़र मो'तबर राहबर फिर मिलेंगे तुझे तू शुरूअ' कर सफ़र खो गया जो गुहर आएगा लौट कर अपनी हस्ती बना तू उसे भूल जा सोचना है तिरा वो न तुम को मिला सच तो ये है मगर तू न उस को मिला उस की क़िस्मत में शायद थी तिश्ना-लबी हो गया जो ख़फ़ा तू उसे भूल जा ये तिरा ख़्वाब है कितना नायाब है तेरे रुख़ पर उसी की चढ़ी ताब है एक ख़ुर्शेद है एक महताब है मान मेरा कहा तू उसे भूल जा दिल में जो दर्द है राह की गर्द है झाड़ दे जो उसे वो बड़ा मर्द है देख ले ज़िंदगी गर्म है सर्द है छोड़ शिकवा-गिला तू उसे भूल जा घर से बाहर निकल करवटें मत बदल चल मिरे साथ चल आँसुओं में न ढल देख ले शाख़ पर एक भीगा कँवल मुस्कुराने लगा तू उसे भूल जा — Nirmal Nadeem
गुलों का रंग न वो चाँदनी का साया था हमारे ख़्वाब में कल रात तू ही आया था वो ख़ुशबुओं की तरह आ के बस गया मुझ में वो एक शख़्स जो कल तक बहुत पराया था अब उस की शाख़ पे आए हैं फूल नूरानी ज़मीं पे दिल की जो दुख का शजर लगाया था वफ़ा के क़त्ल पे जब तीरगी उतारू थी जुनूँ ने ख़ून से अपने दिया जलाया था अभी भी दश्त की वीरानियों में रहता है हुई थी जिस को मुहब्बत, जो मुस्कुराया था उसी में हम भी थे तुम भी थे इश्क़ भी तो था वो एक क़िस्सा जो हम ने तुम्हें सुनाया था नदीम जानू पे सर रख के सो रही है क़ज़ा कहाँ ये जाती इसे मैं ने ही बुलाया था — Nirmal Nadeem