Haresh Vanza

Top 10 of Haresh Vanza

    ख़ुदा के अब्द को तो है मुआ'फ़ी की ताईद
    हम ऐसे दहरिया जाए कहाँ गुनह ले कर
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    उस से उल्फ़त की इल्तिजा करना
    या'नी पत्थर को पूजते जाना
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    तमाशा बनने से बेहतर यही है चुप रहा जाए
    भले दुनिया फिर अंदाज़े लगाने पर ही आ जाए

    जो ज़ाहिर थीं वो बातें तो किताबों में बहुत पढ़ लीं
    चलो अब के किसी की ख़ामुशी को भी पढ़ा जाए

    तलाशे जाएँ सब से पहले तो ऐब-ओ-हुनर ख़ुद के
    किसी को बा'द में अच्छा बुरा इंसाँ कहा जाए

    तुम्हारी राय यक-दम ही बदलती जाएगी उस पर
    अगर वो मुद्द'आ दोनों तरफ़ से जो सुना जाए

    मुसीबत और इस अफ़सुर्दगी से इतना क्या डरना
    कहीं ये डर तुम्हारी हौसला-मंदी न खा जाए
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    आवारा क्यूँ कहते हो उस को वक़्त का मारा कहो
    वो क़ैस बन कर घूमता है उस को बेचारा कहो

    क्या आपने मुझ को अभी टूटा हुआ तारा कहा
    दिल की तसल्ली के लिए इक बार दोबारा कहो

    ख़ुशियाँ हमारी ले के जाओ अपने ग़म के बदले में
    चाहे भले फिर आप कल हम को ही नाकारा कहो

    इक शख़्स जिस ने आप का हर तीर सीने पे लिया
    किस मुँह से कायर कह रहे हो उस को सफ़-आरा कहो

    वो इक न इक दिन तो दुखाएगा तुम्हारा दिल 'हरेश'
    दिल खोलकर चाहे उसे तुम कितना भी प्यारा कहो
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    हमारे वास्ते बस वो घड़ी भर को ठहर जाए
    हमें अपना कहे इक बार फिर चाहे मुकर जाए

    हम ऐसे लोग जिन का साथ कोई भी नहीं देता
    कहाँ जाएँ करें क्या दर्द जब हद से गुज़र जाए

    सँभाले हैं न जाने कब से आँसू उस ने आँखों में
    कोई पल भर गले से भी लगा ले तो बिखर जाए

    किसी दिन ज़िन्दगी के भी सही मा'नी समझ लोगे
    मुहब्बत का नशा बस आप के सर से उतर जाए

    बदलता जा रहा है शौक़ वो भी आजकल अपने
    हमारे हिस्से की अब के मुहब्बत भी न मर जाए
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    मुहब्बत का नशा हम ने ज़ियादा कर लिया है
    ग़मों का ज़िन्दगी में यूँ इज़ाफ़ा कर लिया है

    हमें भी याद करता था कोई हमराह अपना
    न जाने क्या हुआ जो अब किनारा कर लिया है

    लबों का मुस्कुराहट से मिलन मुमकिन नहीं अब
    उदासी संग धंधा कुछ ज़ियादा कर लिया है

    हमारी धड़कनें दें साथ जब तक भी हमारा
    तुम्हें ही चाहते रहने का वा'दा कर लिया है

    हमेशा ही तड़पने का इरादा हो किसी का
    ग़मों के बीच अपना यूँ ठिकाना कर लिया है

    बिछड़ कर जान तुम से ज़िन्दगी के इस सफ़र में
    किसी को दिल न देने का इरादा कर लिया है

    कभी ला भी सकेंगे राह पे ख़ुद को 'हरेश' अब
    हमारे ख़्वाब क्या थे और ये क्या कर लिया है
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    याद इक शख़्स की और बेरोज़गारी रही
    बस यही है मियाँ दास्ताँ जो हमारी रही

    अपनी ही राह को काँटों से हम सजाते रहे
    इश्क़ की ये बला इस क़दर हम पे भारी रही

    मुस्कुराहट सुकूँ नींद उम्मीद सब छिन गया
    साथ जैसे मुहब्बत नहीं इक जुआरी रही
    इश्क़ दोनों तरफ़ से अगर हम-सरी था तो फिर
    क्यूँ बिछड़ते हुए आँख नम बस हमारी रही

    दुख मिला तो मिला हर किसी को यहाँ चैन भी
    इक हमारी ही दाइम ग़मों पे सवारी रही
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    इश्क़ कर के हो गया बर्बाद वो शख़्स
    चाहता तो क्या नहीं कर सकता था वो
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