मुहब्बत का नशा हमने ज़ियादा कर लिया है
ग़मों का ज़िन्दगी में यूँ इज़ाफ़ा कर लिया है
हमें भी याद करता था कोई हमराह अपना
न जाने क्या हुआ जो अब किनारा कर लिया है
लबों का मुस्कुराहट से मिलन मुमकिन नहीं अब
उदासी संग धंधा कुछ ज़ियादा कर लिया है
हमारी धड़कनें दें साथ जब तक भी हमारा
तुम्हें ही चाहते रहने का वादा कर लिया है
हमेशा ही तड़पने का इरादा हो किसी का
ग़मों के बीच अपना यूँ ठिकाना कर लिया है
बिछड़कर जान तुमसे ज़िन्दगी के इस सफ़र में
किसी को दिल न देने का इरादा कर लिया है
कभी ला भी सकेंगे राह पे ख़ुद को 'हरेश' अब
हमारे ख़्वाब क्या थे और ये क्या कर लिया है
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