Haresh vanza

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@vanzaharesh

Haresh vanza shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Haresh vanza's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
ख़ुदा के अब्द को तो है मुआफ़ी की ताईद
हम ऐसे दहरिया जाए कहाँ गुनह ले कर
Haresh vanza
वो ज़िंदगी भी कोई भला ज़िंदगी हुई
जो दूसरों की ज़िंदगी पे बोझ बनती जाए
Haresh vanza
कोई हमें रखे न रखे याद ऐ वतन
दिल में सुकून है कि तेरे कुछ तो काम आए
Haresh vanza
मसअला कुछ तो गँवाने का था मेरे दर-पेश
जो मैं हर जीती हुई बाज़ी को ठुकराता गया
Haresh vanza
क्यूँ हमें रखती है बेचैन ये शय इतना 'हरेश'
ऐसा क्या है जो नहीं खोना है इक दिन जा के
Haresh vanza
कुछ इस सबब भी दर्द को रक्खा है सीने में
उस को निकाला तो तू भी निकलेगा उस के साथ
Haresh vanza
ये मोहब्बत में बड़ी हार समझ लो मेरी
आज मैं उस की ख़ुशी में दुखी मालूम पड़ा
Haresh vanza
हयात को लिए मैं आ गया हूँ मर्ग के दर
किसी का ग़ुस्सा किसी और पे निकाल दिया
Haresh vanza
उन को डर है कि कोई राज़ न खुल जाए कहीं
और मुझ में वो तलब है कि कोई सच न दबे
Haresh vanza
जब कोई भी नहीं होता तो मैं होता हूँ कुछ
ये समझने में बड़ी देर लगा दी मैंने
Haresh vanza
मेरे लिए ये कोई नया सानिहा नहीं
इक वक़्त बाद हर किसी ने छोड़ा है मुझे
Haresh vanza
मेरी इस हालत पे हँसने वाले ऐ शख़्स
एक दिन दुनिया तुझे भी आज़माए

तुझ को भी मजबूर कर दे तेरे अपने
दिल दुखाने की तू भी क़ीमत चुकाए
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Haresh vanza
जब ख़ुश हुए तो बातों ही बातों में रो पड़े
और ग़म की आग में जले हँसते हँसाते हम
Haresh vanza
अब और दुआएँ हमें जीने की न दीजे
मुरझाए हुए पेड़ को पानी नहीं देते
Haresh vanza
उस से उल्फ़त की इल्तिजा करना
यानी पत्थर को पूजते जाना
Haresh vanza
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रंज से जो भर गए ख़ुद से लिपट के रो लिए
संग दिल को क्या सुनाते हम फ़साना दर्द का
Haresh vanza
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मैं सब्ज़ की दुनिया में हूँ सूखा दरख़्त 
ये तितलियाँ मुझ तक भला क्यूँ आएँगी
Haresh vanza
इस तजस्सुस की कोई तो इंतिहा आए नज़र में
दिन-ब-दिन ये ज़िन्दगी भी सहरा होती जा रही है
Haresh vanza
समझा लिया है मैंने अपने दिल को अब
जाओ लडाओ नैन दिल चाहे जहाँ
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तुम्हारे ही मुताबिक़ क्यूँ जिए जाएँ
मुहब्बत की है बेचा थोड़ी है ख़ुद को
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