तमाशा बनने से बेहतर यही है चुप रहा जाए
भले दुनिया फिर अंदाज़े लगाने पर ही आ जाए
जो ज़ाहिर थीं वो बातें तो किताबों में बहुत पढ़ लीं
चलो अब के किसी की ख़ामुशी को भी पढ़ा जाए
तलाशे जाएँ सब से पहले तो ऐब-ओ-हुनर ख़ुद के
किसी को बा'द में अच्छा बुरा इंसाँ कहा जाए
तुम्हारी राय यक-दम ही बदलती जाएगी उस पर
अगर वो मुद्द'आ दोनों तरफ़ से जो सुना जाए
मुसीबत और इस अफ़सुर्दगी से इतना क्या डरना
कहीं ये डर तुम्हारी हौसला-मंदी न खा जाए
— Haresh Vanza















