आवारा क्यूँँ कहते हो उस को वक़्त का मारा कहो
वो क़ैस बन कर घूमता है उस को बेचारा कहो
क्या आपने मुझ को अभी टूटा हुआ तारा कहा
दिल की तसल्ली के लिए इक बार दोबारा कहो
ख़ुशियाँ हमारी ले के जाओ अपने ग़म के बदले में
चाहे भले फिर आप कल हम को ही नाकारा कहो
इक शख़्स जिस ने आप का हर तीर सीने पे लिया
किस मुँह से कायर कह रहे हो उस को सफ़-आरा कहो
वो इक न इक दिन तो दुखाएगा तुम्हारा दिल 'हरेश'
दिल खोलकर चाहे उसे तुम कितना भी प्यारा कहो
— Haresh Vanza















