इश्क़ से भी बुरा और क्या होगा
इश्क़ जब दूसरी मर्तबा होगा
इश्क़ जब दूसरी मर्तबा होगा
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राबता ये अपना चार दिन भी क्यूँ चला नहीं
कोई छोड़ दे मुझे मैं इतना भी बुरा नहीं
कोई छोड़ दे मुझे मैं इतना भी बुरा नहीं
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ख़ुद का हम कितना ख़सारा करते
हम अगर इश्क़ दुबारा करते
हम अगर इश्क़ दुबारा करते
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बे-वफ़ा को आपने दिल दे दिया है
इतना अच्छा होना भी अच्छा नहीं है
इतना अच्छा होना भी अच्छा नहीं है
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दर्द होता है थोड़ा सा बस
हिज्र से कोई मरता नहीं
हिज्र से कोई मरता नहीं
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