ये हमें किस ने वर्चस्व की लड़ाई दी
जो है ही नहीं उसे खोते हम हैं
जो है ही नहीं उसे खोते हम हैं
है सारी रात का दर्द हम कुत्तों को
हो कोई उदास रोते हम हैं
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ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर
अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
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मेरे नशेमन में किसी तरह का अँधेरा नहीं है
उस ख़्वाब में न जी पाऊँगा जो मेरा नहीं है
उस ख़्वाब में न जी पाऊँगा जो मेरा नहीं है
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फ़रिश्ते फ़ुर्सत में बैठ कर लिखते हैं किसी का ख़राब होना
हर अंगूर की किस्मत में नहीं होता है शराब होना
हर अंगूर की किस्मत में नहीं होता है शराब होना
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हम से क्या मान सम्मान की बातें 'रिंद'
हम ने शराब के लिए किताबें बेची है
हम ने शराब के लिए किताबें बेची है
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परिंदे तो सभी है पिंजरों में क़ैद
पतंगों का आसमान है ख़्वाब मेरे
जहाँ सभी मुसाफिर थक हार के पहुंचे
जन्नतों का शमशान है ख़्वाब मेरे
मैं इस मकाँ से उस मकाँ में दर-ब-दर
दीवारों के दरमियान है ख़्वाब मेरे
रात भी बदल के सुब्ह हो गई
अब तलक वीरान है ख़्वाब मेरे
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परिंदे की परवाज सुनाई दी है
गगन में कोई आवाज सुनाई दी है
गगन में कोई आवाज सुनाई दी है
ये कांसा टूटा या दिल था किसी का
सिक्कों के बिखरने की आवाज सुनाई दी है
मैं सोचता था दिल धड़कता तो होगा
मुद्दतों बा'द आज आवाज सुनाई दी है
मैं जब भी किसी अनजान शहर से गुजरा
मुझे एक जानी पहचानी आवाज सुनाई दी है
याद तुम्हारी बारहा तो नहीं आई मगर
मुझे अक्सर तुम्हारी आवाज सुनाई दी है
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एक दिन मैं अपने घर मेहमान हुआ
ताक पर रख दी आवारगी ज़िन्दगी भर की
मैं ने हादसों से अपनी झोली भर ली
जैसे कमाई हो किसी लंबे सफ़र की
कोई इतना मुतमईन कैसे हो सकता है
जाम भी ना लिया ज़िन्दगी भी बसर की
दिन तो कयामत था गुज़ारा नहीं गया
रात तो ज़िन्दगी थी सो बसर की
हाँ फसाना तो मैं भूल गया लेकिन
कुछ गलियाँ याद है तेरे शहर की
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हम सब को इसी हैरत में मर जाना है
कि मर के फिर किधर जाना है
कि मर के फिर किधर जाना है
अच्छा हो गर हो बैचेनी का कोई सबब
ये क्या कि पता ही नहीं क्या पाना है
मेरे पास रखे हैं बहुत से काग़ज़ के फूल
क्या तुम्हारी नजर में कोई बुतख़ाना है
एक तो गिला न कर सका बारिशों का
और उस पर शौक तो ये है कि नहाना है
क्या कभी शाम की आँखों में तुम ने
डूबते सूरज के दर्द को पहचाना है
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