किसी को आज़माना हो तो सच कह दो
    किसी का दिल दुखाना हो तो सच कह दो

    किसी से दूर जाने का अगर तुम पर
    जो नइँ कोई बहाना हो तो सच कह दो

    ज़माने भर से उक्ता कर अगर तुम को
    कहीं पे दिल लगाना हो तो सच कह दो

    किसी पामाल रस्ते पर जो टकराए
    कोई साथी पुराना हो तो सच कह दो

    किसी दिन आइने में देख कर ख़ुद को
    तुम्हें कुछ भी बताना हो तो सच कह दो
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    Abhinav Srivastav
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    घर में अब दीवार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है
    लोगों पर दीनार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है

    रिश्ते नातों से भूख प्यास तक सबके सौदे हैं
    यूँ शहर में बाज़ार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है

    कितनी यादें कितनी बातें कितना कुछ कहना है
    शाइ'र पे अश'आर बहुत हैं फिर भी तन्हाई है

    इतनी छोटी दुनिया में सब आस पास ही रहते हैं
    मिलने के आसार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है

    बड़ी अजब सी हालत है कैसे किस को समझाएँ
    महफ़िल में किरदार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है

    कितने नए पुराने क़िस्से भी हैं सरगोशी को फिर
    पढ़ने को अख़बार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है

    अब थोड़े से पल भी हैं फ़ुर्सत के और इधर तो
    महीने में इतवार बहुत हैं फिर भी तन्हाई है
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    Abhinav Srivastav
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    फूलों से उस को निखारा जा रहा है
    तितलियों का हक़ भी मारा जा रहा है

    ज़ेहन तक सबके उतर जाने की ज़िद थी
    हुस्न को फिर क्यूँ सँवारा जा रहा है
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    Abhinav Srivastav
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    अब फ़स्लों को बीमारी से दूर रखा जाए
    बच्चों को दुनियादारी से दूर रखा जाए

    इक उपवन में फिरती इक मासूम ग़ज़ाला को
    सय्यादों की अय्यारी से दूर रखा जाए

    ख़्वाबों से रोटी का सौदा करने निकला बाप
    उस को उस की लाचारी से दूर रखा जाए

    सब से मिलना पड़ता है झूठा चेहरा ले कर
    मुझ को अब रिश्तेदारी से दूर रखा जाए

    हर बच्चे को मिल जाए हर बार खिलौने भी
    त्यौहारों को नादारी से दूर रखा जाए
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    Abhinav Srivastav
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    सजते हो तो अच्छे लगते हो
    मिलते हो तो अच्छे लगते हो

    कितनी अच्छी बातें तुम पे हैं
    करते हो तो अच्छे लगते हो

    दिल में ख़ंजर ले कर आ जाओ
    चुभते हो तो अच्छे लगते हो

    फिर से मुझ को पागल कह भी दो
    कहते हो तो अच्छे लगते हो

    मेरे ज़ख़्मों पर भी हँस दो तुम
    हँसते हो तो अच्छे लगते हो

    सुन लो मेरे मन की बातें भी
    सुनते हो तो अच्छे लगते हो

    मुझ को देखो आहें भर भी लो
    भरते हो तो अच्छे लगते हो
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    Abhinav Srivastav
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    लाख ग़म थे मैं ने बोतल खोल ली
    दिन भी कम थे मैं ने बोतल खोल ली

    तब से लौटा ही नहीं वो जो गया
    प्याले नम थे मैं ने बोतल खोल ली

    अच्छा ख़ासा आदमी था मर गया
    टूटे दम थे मैं ने बोतल खोल ली

    दिल-लगी का मुझ को हासिल मिल गया
    दूर हम थे मैं ने बोतल खोल ली

    बज़्म उस की रिंदों की बस्ती लगी
    क्या भरम थे मैं ने बोतल खोल ली

    लोग पढ़ते थे दुआऍं रात तक
    ज़ेर-ओ-बम थे मैं ने बोतल खोल ली

    ज़िंदगी का फ़लसफ़ा समझा मैं जब
    दो क़दम थे मैं ने बोतल खोल ली
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    Abhinav Srivastav
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    इतने किरदार निभाने पड़ते हैं
    सारे अनवार जलाने पड़ते हैं

    सब से मिलना जुलना भी पड़ता है
    सब को असरार बताने पड़ते हैं

    सब
    में थोड़ा सा बँटना पड़ता है
    दिल में बाज़ार लगाने पड़ते हैं

    थोड़ी ख़ुशियाँ हिस्से में लाने को
    खुल के दीनार लुटाने पड़ते हैं

    अपनी दस्तार बचाने को अक्सर
    सारे औज़ार सजाने पड़ते हैं
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    Abhinav Srivastav
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    दिल को लगा कर छोड़ देने का हुनर आया नहीं
    आसान था फिर लौट आना मैं मगर आया नहीं

    ये लोग कह कर थक गए अब मैं भी थम जाऊँ ज़रा
    उन से मैं ये कैसे कहूँ बस मेरा घर आया नहीं

    सारी ही शब जागा रहा इक ख़्वाब की ता'बीर में
    उस ख़्वाब का वो एक हिस्सा रात भर आया नहीं

    तुम इश्क़ कह लो या कि ज़िद या फिर जुनूनी सिरफिरा
    यूँ ही अकेला चल पड़ा जब हम सफ़र आया नहीं

    बस उम्र भर तैरा किया मैं तो उलट हर लहर पे
    फिर सोचता हूँ क्यूँ समुन्दर मेरे दर आया नहीं

    छोड़ो भी अब जाने भी दो किस से हमारा ग़म कहें
    क्या हो गया जो उस मोहब्बत का असर आया नहीं
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    Abhinav Srivastav
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    बरगदों के छाँव चल के देख लेना चाहिए
    आज नंगे पाँव चल के देख लेना चाहिए

    चेहरे पर दिखने लगी है शहर की ये धूल अब
    सोचता हूँ गाँव चल के देख लेना चाहिए

    सुर्ख़ फूलों से अगर कुछ काम होता नइँ दिखे
    इश्क़ में कुछ दाँव चल के देख लेना चाहिए

    आज लगता है कि कोई इस गली आ जाएगा
    कौए बोले काँव चल के देख लेना चाहिए
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    Abhinav Srivastav
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