तेरी नफ़ासत से गुज़ारिश है मिरी
ऐसी ही तू रहना ये ख़्वाहिश है मिरी
ऐसी ही तू रहना ये ख़्वाहिश है मिरी
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तुम कितना अच्छा गाती हो
फिर नाम से बुलाती हो
फिर नाम से बुलाती हो
अनपढ़ सा बच्चा हूँ सुनो
तुम बच्चों को पढ़ाती हो
इक राह तक रहा हूँ मैं
कितना समय लगाती हो
सब ख़्वाब भूल जाता हूँ
तुम सुब्ह जब जगाती हो
ये किस का ग़ुस्सा है जो तुम
बातें मुझे सुनाती हो
अब याद भी नहीं हो तुम
अब याद भी न आती हो
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"इंतिज़ार"
जब कभी बारिश
ज़मीं को छूती है
मुझे याद आता है वो वक़्त
जब हम दस क़दम की
दूरी पर रहते थे
दस क़दम की दूरी अब
दो सौ दस मील में बदल गई है
वो सब कुछ बदल गया है
जो सोचा भी नहीं था
क्या तू भी बदल गई है
अगर हाँ तो उन मसाइल को समझ
वक़्त रहते जिन का हल न मिला मुझे
मुझे अफ़सोस भी है कि
एक लफ़्ज़ भी न कहा तुझ से
इतना डर लगता था मुझे
मैं जानता हूँ मोहब्बत
डरने वालों का काम नहीं है
ख़बर तुझे भी है
ख़बर मुझे भी है
मेरी मोहब्बत नाकाम नहीं है
नाकाम तो मैं हूँ दुनिया की नज़र में
कच्चा घर जिस के सामने कच्ची गलियाँ
तेरे शौक़ के लिए यहाँ कुछ भी नहीं है
हाँ मगर ज़रूरत का सब सामान है
काग़ज़, क़लम, शजर, महकती कलियाँ
वो कलियाँ जिन्हें कब से
तेरे एक लम्स की दरकार है
वो शजर जो बूढ़ा हो गया है
उस से कहा था कभी किसी ने
प्यार तो इंतिज़ार है
Read Fullज़मीं को छूती है
मुझे याद आता है वो वक़्त
जब हम दस क़दम की
दूरी पर रहते थे
दस क़दम की दूरी अब
दो सौ दस मील में बदल गई है
वो सब कुछ बदल गया है
जो सोचा भी नहीं था
क्या तू भी बदल गई है
अगर हाँ तो उन मसाइल को समझ
वक़्त रहते जिन का हल न मिला मुझे
मुझे अफ़सोस भी है कि
एक लफ़्ज़ भी न कहा तुझ से
इतना डर लगता था मुझे
मैं जानता हूँ मोहब्बत
डरने वालों का काम नहीं है
ख़बर तुझे भी है
ख़बर मुझे भी है
मेरी मोहब्बत नाकाम नहीं है
नाकाम तो मैं हूँ दुनिया की नज़र में
कच्चा घर जिस के सामने कच्ची गलियाँ
तेरे शौक़ के लिए यहाँ कुछ भी नहीं है
हाँ मगर ज़रूरत का सब सामान है
काग़ज़, क़लम, शजर, महकती कलियाँ
वो कलियाँ जिन्हें कब से
तेरे एक लम्स की दरकार है
वो शजर जो बूढ़ा हो गया है
उस से कहा था कभी किसी ने
प्यार तो इंतिज़ार है
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"मुझे नहीं मालूम"
मुझे नहीं मालूम
क्या आबाद करेगा
ये शौक़-ए-सुख़न
मुझे बर्बाद करेगा
मेरा साया तो
स्याह तमस है
मेरा परतव आख़िर
किसे रौशन करेगा
ज़िंदा मख़्सूस नहीं
किसी के लिए
जाने के बा'द
कौन याद करेगा
सही कहा था
लिखना छोड़ दो
माना लोग पढ़ेंगे
समझा कौन करेगा
Read Fullक्या आबाद करेगा
ये शौक़-ए-सुख़न
मुझे बर्बाद करेगा
मेरा साया तो
स्याह तमस है
मेरा परतव आख़िर
किसे रौशन करेगा
ज़िंदा मख़्सूस नहीं
किसी के लिए
जाने के बा'द
कौन याद करेगा
सही कहा था
लिखना छोड़ दो
माना लोग पढ़ेंगे
समझा कौन करेगा
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जबसे उस ने अपने सारे ढंग बदले
तब से मेरे कमरे के भी रंग बदले
तब से मेरे कमरे के भी रंग बदले
इक नज़र के साए में आए मिरे पग
फिर मिरे पग उस नज़र के संग बदले
मुझ से लड़कर रब से बोला उस ने या रब
रब कभी ना इश्क़ की ये जंग बदले
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"दस्तक"
बाहर कौन है
कोई भी तो नहीं
ऐसा लगा जैसे
किसी ने दस्तक दी
देखो क्या रह गई
कोई खिड़की खुली
चलो चराग़ बुझा दो
रखा है क़रीब ही
सोने के वक़्त यहाँ
आएगा कौन ही
तुम जगा देना मुझे
जो सुनो दस्तक कोई
पानी रख लिया क्या
हाँ, और दवाई भी
अब मैं जो सोचती हूँ
कह देते हो तुम वही
झूठ कहते हैं सब
चार दिन की ज़िन्दगी
सत्तर बरस के हम
साथ हैं आज भी
Read Fullकोई भी तो नहीं
ऐसा लगा जैसे
किसी ने दस्तक दी
देखो क्या रह गई
कोई खिड़की खुली
चलो चराग़ बुझा दो
रखा है क़रीब ही
सोने के वक़्त यहाँ
आएगा कौन ही
तुम जगा देना मुझे
जो सुनो दस्तक कोई
पानी रख लिया क्या
हाँ, और दवाई भी
अब मैं जो सोचती हूँ
कह देते हो तुम वही
झूठ कहते हैं सब
चार दिन की ज़िन्दगी
सत्तर बरस के हम
साथ हैं आज भी
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