"मुझे नहीं मालूम"
मुझे नहीं मालूम
क्या आबाद करेगा
ये शौक़-ए-सुख़न
मुझे बर्बाद करेगा
मेरा साया तो
स्याह तमस है
मेरा परतव आख़िर
किसे रौशन करेगा
ज़िंदा मख़्सूस नहीं
किसी के लिए
जाने के बाद
कौन याद करेगा
सही कहा था
लिखना छोड़ दो
माना लोग पढ़ेंगे
समझा कौन करेगा
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