अब फ़स्लों को बीमारी से दूर रखा जाए
बच्चों को दुनियादारी से दूर रखा जाए
इक उपवन में फिरती इक मासूम ग़ज़ाला को
सय्यादों की अय्यारी से दूर रखा जाए
ख़्वाबों से रोटी का सौदा करने निकला बाप
उस को उस की लाचारी से दूर रखा जाए
सब से मिलना पड़ता है झूठा चेहरा ले कर
मुझ को अब रिश्तेदारी से दूर रखा जाए
हर बच्चे को मिल जाए हर बार खिलौने भी
त्यौहारों को नादारी से दूर रखा जाए
— Abhinav Srivastav















