तरह तरह के सामानों में बँट जाएगा
पत्थर का घर इंसानों में बँट जाएगा
जो राहत का पैसा सरकारों ने भेजा
वो पैसा बेईमानों में बँट जाएगा
उस का दिल सूना है अब पहले के जैसे
उस का पैकर दीवानों में बँट जाएगा
आँखों ने बस अच्छी यादें ले कर रख लीं
ग़म आँखों से मय-ख़ानों में बँट जाएगा
तितली से पूछो कुछ खाया है क्या उस ने
गुलशन सारा भगवानों में बँट जाएगा
क्यूँ निकली लड़की तन्हाई में ऐसे अब
घर का सपना हैवानों में बँट जाएगा
— Abhinav Srivastav















