हम तिरा नाम बेंच पर अपनी
    रोज़ लिखते हैं और मिटाते हैं
    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    और हम को चाहिए क्या ईद पे ईदी भला
    आप हम को दीजिए बस एक बोसा गाल पे
    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    रंग सारे आ गए आरिज़ पे मेरे
    जब कहा उस ने मुझे होली मुबारक
    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    रात दिन जिस को तू हर दम सोचती है
    क्या वही इक शख़्स तेरी ज़िंदगी है

    देख कर तस्वीर तेरी सोचता हूँ
    ईद से पहले मुझे ईदी मिली है

    रात सारी कट गई ये सोचने में
    क्या उसे मुझ से मोहब्बत आज भी है
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    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    है अगर इतनी तू ख़फ़ा दुनिया
    जा रहा हूँ मैं अलविदा दुनिया

    हार के ख़ुद-कुशी मैं कर लूँगा
    और मत मुझ को आज़मा दुनिया

    साथ कोई यहाँ नहीं देता
    सब यहाँ पे हैं बे-वफ़ा दुनिया

    कर लिया क़ैद तुम को मैंने भी
    बन गई जब तू काफ़िया दुनिया

    मर रहा हूँ बड़े सुकूँ से मैं
    सो तिरा दिल से शुक्रिया दुनिया

    दोस्ती ख़त्म हो गई मेरी
    बन गई जब से नासेहा दुनिया

    बात उस तक पहुँच गई मेरी
    दरमियाँ कोई है ख़ुदा दुनिया
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    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    मोहब्बत के ज़माने आ गए हैं
    उसे रिश्ते निभाने आ गए हैं

    मेरे अहबाब मुझ को कर के तन्हा
    दुबारा दिल दुखाने आ गए हैं

    शिफ़ाई जौन ग़ालिब मीर जैसे
    हमें भी ग़म छुपाने आ गए हैं

    तुम्हें देखा तो मुझ को याद फिर से
    वही नग़में पुराने आ गए हैं

    बनाये चाँद तारे जब से मैंने
    मुझे कंगन बनाने आ गए हैं
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    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    कौन कहता है मोहब्बत तुम करो
    कर सको जो हम से नफ़रत तुम करो

    लखनऊ पंजाब दिल्ली पर नहीं
    जाँ मिरे दिल पर हुक़ूमत तुम करो

    विष कभी जो पी लो मीरा की तरह
    बाद में कान्हा की चाहत तुम करो

    इक दफ़ा देखो हमारे जौन को
    फिर मोहब्बत की वकालत तुम करो

    लोग देखें और बस हैरत करें
    इश्क़ की ऐसी किताबत तुम करो
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    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    यूँ तो तेरे बाद मुझको मौत आनी है कहाँ
    ज़िन्दा रहने की मगर इस दिल ने ठानी है कहाँ

    याद रहता ही नहीं कब कौन कैसे क्यों किधर
    बात कोई याद रखनी या भुलानी है कहाँ

    आज भी महफ़ूज़ दिल में है तेरी तस्वीर पर
    फ़ोन में लेकिन तेरी फ़ोटो निशानी है कहाँ

    गाँव सारा घूम आया बस मिले कान्हा मुझे
    आज होली है मगर कान्हा की रानी है कहाँ

    मिल गए हैं यार सारे खो गए थें जो मगर
    अब हमारे बीच वो यारी पुरानी है कहाँ
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    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    बना होगा किसी भी रोज़ तो पत्थर बना होगा
    कहीं फिर बाद में वो शख़्स चारा-गर बना होगा
    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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    सड़क चौक रस्ते सभी हैं वहीं पर
    हुआ अजनबी कोई तो यार तुम हो

    यही सामने बोलता हूँ सभी के
    मिरा प्यार तुम हो मिरा प्यार तुम हो
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    Yashvardhan Mishra 'Hind'
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