है अगर इतनी तू ख़फ़ा दुनिया

जा रहा हूँ मैं अलविदा दुनिया

हार के ख़ुद-कुशी मैं कर लूँगा
और मत मुझ को आज़मा दुनिया

साथ कोई यहाँ नहीं देता
सब यहाँ पे हैं बे-वफ़ा दुनिया

कर लिया क़ैद तुम को मैं ने भी
बन गई जब तू काफ़िया दुनिया

मर रहा हूँ बड़े सुकूँ से मैं
सो तिरा दिल से शुक्रिया दुनिया

दोस्ती ख़त्म हो गई मेरी
बन गई जब से नासेहा दुनिया

बात उस तक पहुँच गई मेरी
दरमियाँ कोई है ख़ुदा दुनिया

— Yashvardhan Mishra 'Hind'

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