बस इसी बात की ख़ुशी है अभी

वो परी मुझ को चाहती है अभी

उस तरफ़ जिस्म का किनारा है
सामने इश्क़ की नदी है अभी

वस्ल के सीन की तवक़्क़ो है
हिज्र की फ़िल्म चल रही है अभी

वक़्त अच्छा कभी तो आएगा
मुंतज़िर हाथ की घड़ी है अभी

ख़ुद-कुशी फिर कभी सही ऐ दिल
ज़िंदगी तो बहुत पड़ी है अभी

— Yashvardhan Mishra 'Hind'

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