यूँँ तो तेरे बा'द मुझ को मौत आनी है कहाँ

ज़िन्दा रहने की मगर इस दिल ने ठानी है कहाँ

याद रहता ही नहीं कब कौन कैसे क्यूँ किधर
बात कोई याद रखनी या भुलानी है कहाँ

आज भी महफ़ूज़ दिल में है तेरी तस्वीर पर
फ़ोन में लेकिन तेरी फ़ोटो निशानी है कहाँ

गाँव सारा घूम आया बस मिले कान्हा मुझे
आज होली है मगर कान्हा की रानी है कहाँ

मिल गए हैं यार सारे खो गए थे जो मगर
अब हमारे बीच वो यारी पुरानी है कहाँ

— Yashvardhan Mishra 'Hind'

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