
सोचता हूँ वक़्त की तस्वीर जब मुझ सेे बनेगी
तो भला उस की कलाई पर घड़ी कैसी लगेगी
चाय उस से पूछ तो सकता हूँ मैं भी दोस्त,लेकिन
सोचता हूँ कौन सा वो कहने भर से चल पड़ेगी
— Abhishar Geeta Shukla
Other sher from the same pen
Shers of dp.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling