कान्हा भी तड़पे थे राधा की ख़ातिर
    हम भी जानाँ तेरे ख़ातिर तड़पे हैं
    Krishnavat Ritesh
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    आज के नेता अपने मुँह में पान घुलाए बैठे हैं
    देश के कोने कोने में ये आग लगाए बैठे हैं
    Krishnavat Ritesh
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    ये सावन ,माह ये ज़ुल्मी जवानी
    ज़माने बाद सब कच्चा लगेगा
    Krishnavat Ritesh
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    फ़िक्र से बे-फ़िक्र थे अब फ़िक्र है घेरे हुए
    वो ज़माना और था अब ये ज़माना और है
    Krishnavat Ritesh
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    ये जो दुनिया है अंधों से लिपटी हुई
    राह तुमको दिखाऊॅं तो क्या हर्ज है

    तुमको बाहों में कस के भरूँ मैं ज़रा
    जिस्म पे तेरे छाऊॅं तो क्या हर्ज है
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    Krishnavat Ritesh
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    मैं ने तुम से मोहब्बत करी है सनम
    नाज़ नख़रे उठाऊॅं तो क्या हर्ज है

    तुम मेरे हो मेरे हो मेरे बस मेरे
    तुम को अपना बताऊॅं तो क्या हर्ज है
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    Krishnavat Ritesh
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    तेरी राधा दीवानी है
    तेरी मीरा दीवानी है

    तेरी तो ऐ मेरे गिरधर
    पूरी दुनिया दीवानी है
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    Krishnavat Ritesh
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    ये माथे पे जो कुमकुम है ये कानों में जो बाली है
    मेरे गर्दन में जो चमके वही कुंदन बना लूँगा
    Krishnavat Ritesh
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    तुम्हें मैं दिल में रखता हूँ तुम्हें धड़कन बना लूँगा
    सुनहरी मैं फ़सल तुमको सुनो तिलहन बना लूँगा

    कि मेरे नाम की मेंहदी तुम्हारे हाथ में चमके
    मेरी माँ मान जाए तो तुम्हें दुल्हन बना लूँगा
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    Krishnavat Ritesh
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    मैं हूँ तुम हो तुम हो मैं हूँ दुनिया से क्या नाता है
    गीत ग़ज़ल के हर मक़्ते में नाम तुम्हारा आता है
    Krishnavat Ritesh
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