किसे जन्नत मिलेगी या किसे दोज़ख़ मिलेगा
इसे भी तय ज़मीं पर रहने वाले कर रहे हैं
इसे भी तय ज़मीं पर रहने वाले कर रहे हैं
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मुझे तुझ से मोहब्बत हो न जाए
बुढ़ापे में फ़ज़ीहत हो न जाए
बुढ़ापे में फ़ज़ीहत हो न जाए
जो आए हो तो साँसे चल रहीं हैं
तेरे जाने से दिक़्क़त हो न जाए
कभी मौका मिले तो हँस लो, गा लो
कहीं रोने की आदत हो न जाए
यक़ीं टूटा है दिल टूटा नहीं है
सँभल जाओ कि नफ़रत हो न जाए
हमारा मूड अब बनने लगा है
कि ऐसे में शरारत हो न जाए
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