Krishnavat Ritesh

Krishnavat Ritesh

@ashritkrishnavat1010

Krishnavat Ritesh shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Krishnavat Ritesh's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

नज़र से नज़र को मिलाओ तो जानूँ
लबो पे लबो को सजाओ तो जानूँ

अगर मुझ से करते हो इतनी मोहब्बत
मोहब्बत मैं मर कर दिखाओ तो जानूँ

Krishnavat Ritesh

मेरे मालिक मेरे मौला तेरा बस इक सहारा हो
जहाँ को जीत लाऊँ मैं तेरा बस इक इशारा हो

Krishnavat Ritesh

हमने सोचा था तुमको सजाऍंगे जी
अपनी दुल्हन तुम्हें हम बनाऍंगे जी

मारकर जाओगी हमने सोचा न था
ग़ैर की बाहों में तुमको पाऍंगे जी

Krishnavat Ritesh

नज़र ने की शिकायत है बरस के
गले से आ मिरे लग जा ज़रा तू

Krishnavat Ritesh

कान्हा भी तड़पे थे राधा की ख़ातिर
हम भी जानाँ तेरे ख़ातिर तड़पे हैं

Krishnavat Ritesh

आज के नेता अपने मुँह में पान घुलाए बैठे हैं
देश के कोने कोने में ये आग लगाए बैठे हैं

Krishnavat Ritesh

काट कर तेरी यादों का जंगल
कोने में इक शजर छोड़ देंगे

Krishnavat Ritesh

गीत गज़ल हो या हो इबादत
मेरे से बेहतर कौन करेगा

Krishnavat Ritesh

ये सावन ,माह ये ज़ुल्मी जवानी
ज़माने बाद सब कच्चा लगेगा

Krishnavat Ritesh

हादसा ये देख करके डर गया है
अब ज़माने से मिरा मन भर गया है

Krishnavat Ritesh

फ़िक्र से बे-फ़िक्र थे अब फ़िक्र है घेरे हुए
वो ज़माना और था अब ये ज़माना और है

Krishnavat Ritesh

ये जो दुनिया है अंधों से लिपटी हुई
राह तुमको दिखाऊॅं तो क्या हर्ज है

तुमको बाहों में कस के भरूँ मैं ज़रा
जिस्म पे तेरे छाऊॅं तो क्या हर्ज है

Krishnavat Ritesh

मैं ने तुम से मोहब्बत करी है सनम
नाज़ नख़रे उठाऊॅं तो क्या हर्ज है

तुम मेरे हो मेरे हो मेरे बस मेरे
तुम को अपना बताऊॅं तो क्या हर्ज है

Krishnavat Ritesh

अब तो मौक़ा मुझे भी दिया जाए जी
ये जहाँ जीत लाऊँ तो क्या हर्ज़ है

Krishnavat Ritesh

तुम्हीं हो साँस में बसती तुम्हीं कण कण में हो मेरे
जो मर के भी न टूटेगा वही बंधन बना लूँगा

Krishnavat Ritesh

तेरी राधा दीवानी है
तेरी मीरा दीवानी है

तेरी तो ऐ मेरे गिरधर
पूरी दुनिया दीवानी है

Krishnavat Ritesh

मैं बरसाने को जाऊँगा मैं कान्हा को मनाऊँगा
जो कान्हा मान जाएँ तो उन्हें कुंदन बना लूँगा

Krishnavat Ritesh

ये माथे पे जो कुमकुम है ये कानों में जो बाली है
मेरे गर्दन में जो चमके वही कुंदन बना लूँगा

Krishnavat Ritesh

तुम्हें मैं दिल में रखता हूँ तुम्हें धड़कन बना लूँगा
सुनहरी मैं फ़सल तुमको सुनो तिलहन बना लूँगा

कि मेरे नाम की मेंहदी तुम्हारे हाथ में चमके
मेरी माँ मान जाए तो तुम्हें दुल्हन बना लूँगा

Krishnavat Ritesh

मैं हूँ तुम हो तुम हो मैं हूँ दुनिया से क्या नाता है
गीत ग़ज़ल के हर मक़्ते में नाम तुम्हारा आता है

Krishnavat Ritesh

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