Manish Shukla

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@manish-shukla

Manish Shukla shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Manish Shukla's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

दुनिया वालों ने तो पूरी कोशिश की ठुकराने की लेकिन अपनी जिद्द में हम ने ख़ुद को मनवा रक्खा है — Manish Shukla
बात करने का हसीं तौर-तरीक़ा सीखा हम ने उर्दू के बहाने से सलीक़ा सीखा — Manish Shukla
किसी के इश्क़ में बर्बाद होना हमें आया नहीं फ़रहाद होना — Manish Shukla
कितनी उजलत में मिटा डाला गया आग में सब कुछ जला डाला गया — Manish Shukla

Ghazal

किसी भी शय पे आ जाने में कितनी देर लगती है मगर फिर दिल को समझाने में कितनी देर लगती है ज़रा सा वक़्त लगता है कहीं से उठ के जाने में मगर फिर लौट कर आने में कितनी देर लगती है बला का रूप ये तेवर सरापा धार हीरे की किसी के जान से जाने में कितनी देर लगती है फ़क़त आँखों की जुम्बिश से बयाँ होता है अफ़्साना किसी को हाल बतलाने में कितनी देर लगती है सभी से ऊब कर यूँँ तो चले आए हो ख़ल्वत में मगर ख़ुद से भी उकताने में कितनी देर लगती है शुऊर-ए-मय-कदा इस की इजाज़त ही नहीं देता वगर्ना जाम छलकाने में कितनी देर लगती है ये शीशे का बदन ले कर निकल तो आए हो लेकिन किसी पत्थर से टकराने में कितनी देर लगती है — Manish Shukla
तू मुझ को सुन रहा है तो सुनाई क्यूँँ नहीं देता ये कुछ इल्ज़ाम हैं मेरे सफ़ाई क्यूँँ नहीं देता मिरे हँसते हुए लहजे से धोका खा रहे हो तुम मिरा उतरा हुआ चेहरा दिखाई क्यूँँ नहीं देता नज़र-अंदाज़ कर रक्खा है दुनिया ने तुझे कब से किसी दिन अपने होने की दुहाई क्यूँँ नहीं देता मैं तुझ को देखने से किस लिए महरूम रहता हूँ अता करता है जब नज़रें रसाई क्यूँँ नहीं देता कई लम्हे चुरा कर रख लिए तू अलग मुझ से तू मुझ को ज़िंदगी-भर की कमाई क्यूँँ नहीं देता ख़ुद अपने-आप को ही घेर कर बैठा है तू कब से अब अपने-आप से ख़ुद को रिहाई क्यूँँ नहीं देता मैं तुझ को जीत जाने की मुबारकबाद देता हूँ तू मुझ को हार जाने की बधाई क्यूँँ नहीं देता — Manish Shukla