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Krish Gour 'Jazbaat'
SHER
ये हाल अपना है इन दिनों अब ये दिल हमारा भरा पड़ा है
इधर पड़ी हैं तुम्हारी यादें उधर सदाएँ पड़ी हुई हैं
Krish Gour 'Jazbaat'
10
SHER
तुम्हें तो नाज़ था लड़के कि वो दिलबर अनोखा है
तो फिर क्यूँ रो रहे बर्बादियों का जाम ले ले कर
Krish Gour 'Jazbaat'
9
SHER
चलो परिंदों अब आँख खोलो तुम्हारी ख़ातिर खुला समा है
इसी उजाले की ख़्वाहिशों में तुम्हीं ने आहें भरी हुई हैं
Krish Gour 'Jazbaat'
8
GHAZAL
हम से कोई आ मिले
सोने को कंधा मिले
Krish Gour 'Jazbaat'
7
SHER
कौन कहता है मुहब्बत मार देगी
मैं तुम्हारे सामने ज़िंदा खड़ा हूँ
Krish Gour 'Jazbaat'
6
SHER
तराशा गया हूँ मैं ख़ुद के ही हाथों
तुम्हें क्या ख़बर है मैं कैसे जिया हूँ
Krish Gour 'Jazbaat'
5
SHER
हम तो ये समझे थे अपने हाथ था
मेंगे
Krish Gour 'Jazbaat'
4
SHER
ज़माने ने हम को दिया भी तो क्या है
ज़रा सी मुहब्बत और इतनी दग़ा है
Krish Gour 'Jazbaat'
3
GHAZAL
हम कभी ऐसा करेंगे
ख़्वाब में आया करेंगे
Krish Gour 'Jazbaat'
2
SHER
अगर घर छोड़ लगता है ये दुनिया हाथ आएगी
ग़लत-फ़हमी न पाला कर तू दुनिया छोड़ आया है
Krish Gour 'Jazbaat'
1
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