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तुम्हें तो नाज़ था लड़के कि वो दिलबर अनोखा है
तो फिर क्यूँ रो रहे बर्बादियों का जाम ले ले कर
तो फिर क्यूँ रो रहे बर्बादियों का जाम ले ले कर
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चलो परिंदों अब आँख खोलो तुम्हारी ख़ातिर खुला समा है
इसी उजाले की ख़्वाहिशों में तुम्हीं ने आहें भरी हुई हैं
इसी उजाले की ख़्वाहिशों में तुम्हीं ने आहें भरी हुई हैं
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ज़माने ने हम को दिया भी तो क्या है
ज़रा सी मुहब्बत और इतनी दग़ा है
ज़रा सी मुहब्बत और इतनी दग़ा है
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अगर घर छोड़ लगता है ये दुनिया हाथ आएगी
ग़लत-फ़हमी न पाला कर तू दुनिया छोड़ आया है
ग़लत-फ़हमी न पाला कर तू दुनिया छोड़ आया है
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