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परिंदे की परवाज सुनाई दी है - Murli Dhakad

परिंदे की परवाज सुनाई दी है
गगन में कोई आवाज सुनाई दी है

ये कांसा टूटा या दिल था किसी का
सिक्कों के बिखरने की आवाज सुनाई दी है

मैं सोचता था दिल धड़कता तो होगा
मुद्दतों बाद आज आवाज सुनाई दी है

मैं जब भी किसी अनजान शहर से गुजरा
मुझे एक जानी पहचानी आवाज सुनाई दी है

याद तुम्हारी बारहा तो नही आई मगर
मुझे अक्सर तुम्हारी आवाज सुनाई दी है

- Murli Dhakad

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