नया इक मोड़ देखो आ गया मेरी कहानी में
दिवाना रोज़ मिल कर भी नहीं मिलता दिवानी में
दिवाना रोज़ मिल कर भी नहीं मिलता दिवानी में
भुला सकती नहीं अब तो मुझे तुम जान कर जाना
ये अपनी जान दी तुझ को मुहब्बत की निशानी में
नहीं होगी जुदा सच्ची मुहब्बत से मुहब्बत अब
मरेगा अब नहीं किरदार भी मेरी कहानी में
उसी के देखने से बस दिया रौशन हुआ होगा
उसी ने देखना छू कर लगा दी आग पानी में
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हिस्से में इश्क़ मेरे क़ब्ज़े में इश्क़ है अब
हर चीज़ भाव में बस सस्ते में इश्क़ है अब
हर चीज़ भाव में बस सस्ते में इश्क़ है अब
कॉपी किताब क्या है कहते हैं आज बच्चे
मैं ने कहा है इन के बस्ते में इश्क़ है अब
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हाँ मिरी पहली नज़र उन से मिली थी जनवरी में
इश्क़ का इज़हार करना है मुझे इस फ़रवरी में
इश्क़ का इज़हार करना है मुझे इस फ़रवरी में
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सब के सब फ़क़त हम इंसान बन के आए थे
फिर हुआ ये मिल कर मज़हब बना दिए हम ने
फिर हुआ ये मिल कर मज़हब बना दिए हम ने
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हर कोई लगा मुझ को नाकाम बनाने में
हम भी है लगे फिर अपना नाम बनाने में
हम भी है लगे फिर अपना नाम बनाने में
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हाँ इश्क़ का इज़हार करना है अभी
तू बिन मुहब्बत के जिया भी है कभी
तू बिन मुहब्बत के जिया भी है कभी
ये दिल किसी के भी नहीं बस में मगर
सच इक यही इस दिल के बस में है सभी
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मुहब्बत से तिरी ये ज़िन्दगी मेरी सँवर जाती
तिरे इक साथ से बस ज़िन्दगी मेरी गुज़र जाती
तिरे इक साथ से बस ज़िन्दगी मेरी गुज़र जाती
मिरा जो हाल है,होता,सभी का ही मुहब्बत में
वही हर-सू नज़र आती जिधर भी ये नज़र जाती
सुना है जागने पर ही तिरे होता सवेरा है
सुना है बंद कर ले आँख तो ये शब ठहर जाती
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