भूली-बिसरी ही सही पर इक कहानी याद हैआदमी है वो उसे अपनी जवानी याद हैभूल जाती है यहाँ लड़की दिवाने को मगरहम दिवानों को वही पहली दिवानी याद हैअब हमारा हो मुकम्मल राब्ता जाने कहाँकौन भूलेगा लबों पर दी निशानी याद है— Kamlesh Goyal