Kamlesh Goyal

Kamlesh Goyal

@kamlesh_goyal7

Kamlesh Goyal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kamlesh Goyal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

सारे जहाँ में आज हर-सू एक ये ए'लान है है जीत हर पन्ने पे हर पन्ने पे हिंदुस्तान है — Kamlesh Goyal
मुझे पहले पहल इस इश्क़ का डर है नहीं बिल्कुल मुझे पहला निवाला माँ हमेशा चख के देती थी — Kamlesh Goyal
पिताजी माँ बहन महबूब या फिर दोस्त हों मेरे हाँ कितने लोग ख़ुश होंगे मिरे बस मुस्कुराने से — Kamlesh Goyal
वहीं जब दर्द के मारे बदन से जाँ निकलती है उसी पर बन के मरहम तब ज़बाँ से माँ निकलती है — Kamlesh Goyal
हाँ मिरी पहली नज़र उन से मिली थी जनवरी में इश्क़ का इज़हार करना है मुझे इस फ़रवरी में — Kamlesh Goyal
हर कोई लगा मुझ को नाकाम बनाने में हम भी है लगे फिर अपना नाम बनाने में — Kamlesh Goyal
मुझे इक दीद की चाहत तुझे देखूँ तुझे देखूँ तिरे दीदार को अटकी हुई है साँस आँखों में — Kamlesh Goyal
इक अकेले नाम से दुनिया नहीं चलती यहाँ राम जी की जय कहो माँ जानकी के साथ में — Kamlesh Goyal
मिलें हम यार दोनों और फिर इक राय हो जाए बड़ा है सर्द मौसम और दो कप चाय हो जाए — Kamlesh Goyal
हाँ ज़मी पर भी नहीं है आसमाँ में भी नहीं उस के जैसी तो मिलेगी दो जहाँ में भी नहीं — Kamlesh Goyal
अगर मौक़ा मिलेगा तो हुनर अपना दिखाएँगे रहेगा बाज पिंजरे में तो उड़ना भूल जाएगा — Kamlesh Goyal
मैं जलवे आप को अपने हुनर के तो दिखाऊँगा मगर कह के नहीं अब कुछ मैं कर के तो दिखाऊँगा — Kamlesh Goyal
हम को यहाँ कोई भी ऐसा मिला नहीं है जिस को जनाब हम सेे कोई गिला नहीं है — Kamlesh Goyal
सब के सब फ़क़त हम इंसान बन के आए थे फिर हुआ ये मिल कर मज़हब बना दिए हम ने — Kamlesh Goyal

Ghazal

हिस्से में इश्क़ मेरे क़ब्ज़े में इश्क़ है अब हर चीज़ भाव में बस सस्ते में इश्क़ है अब कॉपी किताब क्या है कहते हैं आज बच्चे मैं ने कहा है इन के बस्ते में इश्क़ है अब करने लगा हूँ मैं भी जब से ये शा'इरी तो देखा है गाँव के हर लड़के में इश्क़ है अब इक रोज़ कह रहे थे राधा से श्याम अब तो हर एक आदमी के क़िस्से में इश्क़ है अब पहले पहल हमारी सच दोस्ती हुई थी अब दोस्त हम नहीं हैं रिश्ते में इश्क़ है अब दोनों ही अपने हाथों से रब ने थे तराशे दुनिया है दूसरे पर पहले में इश्क़ है अब पूछा ख़ुदा ने मुझ से दौलत है या मुहब्बत कह दी ख़ुदा से मेरे हिस्से में इश्क़ है अब मौला बता दे तेरा क्या है यही तमाशा महलों में जिस्म है अब रस्ते में इश्क़ है अब कमलेश का है कहना सब मोह सब है माया पर्दे में धन कमाया शीशे में इश्क़ है अब — Kamlesh Goyal
हाँ सखी के हाथ में छाले पड़े हैं हर किसी के हाथ में छाले पड़े हैं फिर उदासी ने है थामा हाथ मेरा फिर ख़ुशी के हाथ में छाले पड़े हैं हाथ होना चाहिए हाथों में जिस के हाँ उसी के हाथ में छाले पड़े हैं जिस किसी ने मुझ पे उँगली थी उठाई उन सभी के हाथ में छाले पड़े हैं मौत मेरा हाथ पकड़े चल रही हैं ज़िन्दगी के हाथ में छाले पड़े हैं वक़्त मेरा इस लिए ठहरा हुआ हैं फिर घड़ी के हाथ में छाले पड़े हैं ज़ख़्म देने वाले अपने ही थे सारे अजनबी के हाथ में छाले पड़े हैं जिस के पीछे हम कभी बचपन में दौड़े उस परी के हाथ में छाले पड़े हैं दिल लगे कमलेश अब कैसे किसी से आशिक़ी के हाथ में छाले पड़े हैं — Kamlesh Goyal