Kamlesh Goyal

Kamlesh Goyal

@kamlesh_goyal7

Kamlesh Goyal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kamlesh Goyal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

मुझे इक दीद की चाहत तुझे देखूँ तुझे देखूँ
तिरे दीदार को अटकी हुई है साँस आँखों में

Kamlesh Goyal

मुझे पहले पहल इस इश्क़ का डर है नहीं बिल्कुल
मुझे पहला निवाला माँ हमेशा चख के देती थी

Kamlesh Goyal

मुहब्बत में सुनो ऐसे सभी के हाल होते हैं
नज़र ये बोलती है और मेरे लब ये रोते हैं

हमें भी दर्द होता है सुनो दिल टूटता है जब
ये लड़के कह नहीं पाते फ़क़त तकिया भिगोते हैं

Kamlesh Goyal

पिताजी माँ बहन महबूब या फिर दोस्त हों मेरे
हाँ कितने लोग ख़ुश होंगें मिरे बस मुस्कुराने से

Kamlesh Goyal

इक अकेले नाम से दुनिया नहीं चलती यहाँ
राम जी की जय कहो माँ जानकी के साथ में

Kamlesh Goyal

यार मैं ये बात फिर कहने में शर्मिंदा नहीं
इश्क़ जिसको है नहीं वो शख़्स ही ज़िंदा नहीं

कह दिया सब सामने मेरी बुरी बंदी नहीं
आप को कहना है अब मेरा बुरा बंदा नहीं

Kamlesh Goyal

मिलें हम यार दोनों और फिर इक राय हो जाए
बड़ा है सर्द मौसम और दो कप चाय हो जाए

Kamlesh Goyal

हिस्से में इश्क़ मेरे क़ब्ज़े में इश्क़ है अब
हर चीज़ भाव में बस सस्ते में इश्क़ है अब

कॉपी किताब क्या है कहते हैं आज बच्चे
मैंने कहा है इन के बस्ते में इश्क़ है अब

Kamlesh Goyal

हाँ ज़मी पर भी नहीं है आसमाँ में भी नहीं
उस के जैसी तो मिलेगी दो जहाँ में भी नहीं

Kamlesh Goyal

मौत के डर से डरें हम फिर ग़लत ये बात है
मौत के पहले मरें हम फिर ग़लत ये बात है

जीत चाहे हार हो सब बाद की ही बात है
अब नहीं कोशिश करें हम फिर ग़लत ये बात है

Kamlesh Goyal

अगर मौक़ा मिलेगा तो हुनर अपना दिखाएँगे
रहेगा बाज पिंजरे में तो उड़ना भूल जाएगा

Kamlesh Goyal

अगर मेरा नशा था उसके सर पे तो उतर जाए
नहीं है इश्क़ उसको मुझ से तो मुँह पर मुकर जाए

मुहब्बत दिल-लगी सब काम हैं साहब दिलेरों के
मगर जो भी यहाँ बुज़दिल है सीधे अपने घर जाए

Kamlesh Goyal

मैं जलवे आप को अपने हुनर के तो दिखाऊँगा
मगर कह के नहीं अब कुछ मैं कर के तो दिखाऊँगा

Kamlesh Goyal

वहीं जब दर्द के मारे बदन से जाँ निकलती है
उसी पर बन के मरहम तब ज़बाँ से माँ निकलती है

Kamlesh Goyal

हम को यहाँ कोई भी ऐसा मिला नहीं है
जिस को जनाब हमसे कोई गिला नहीं है

Kamlesh Goyal

हाँ मिरी पहली नज़र उन से मिली थी जनवरी में
इश्क़ का इज़हार करना है मुझे इस फ़रवरी में

Kamlesh Goyal

सब के सब फ़क़त हम इंसान बन के आए थे
फिर हुआ ये मिल कर मज़हब बना दिए हम ने

Kamlesh Goyal

हर कोई लगा मुझको नाकाम बनाने में
हम भी है लगे फिर अपना नाम बनाने में

Kamlesh Goyal

बे-वफ़ा होती नहीं हर एक लड़की
कुछ मियाँ दिल की यहाँ सच्ची है होती

इश्क़ हर लड़की से होता भी नहीं है
हाँ मगर साथी बड़ी अच्छी है होती

Kamlesh Goyal

मियाँ इसमें निकल जाता है दम भी अच्छे-अच्छों का
कहा भी था नहीं है फिर मुहब्बत खेल बच्चों का

Kamlesh Goyal

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